राजपथ - जनपथ
अब वो रूतबा नहीं आयकर में ?
एक दौर था कि आयकर विभाग की नौकरी दबदबे और रुतबे वाली होती थी। लेकिन अब तो यहां के भी अफसर कर्मी भी नौकरी छोडऩे लगे हैं।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जारी संसद सत्र में पिछले सप्ताह एक लिखित उत्तर में जानकारी दी कि बीते 10 वर्षो में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) देश भर के 850 अधिकारियों ने नौकरी न करने के इरादे से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। इनमें 383 आयकर, 470 कस्टम और अन्य राजस्व विभाग के अफसर हैं। यह तो हुई आधिकारिक जानकारी। अब गैर आधिकारिक और इनके पीछे छिपे कारणों की। जो रायपुर में पदस्थ और वीआरएस लेने वाले कुछ अधिकारियों से चर्चा के आधार पर- इनमें से बहुसंख्य दिल्ली मुंबई और अन्य मेट्रो शहरों के हैं।
आप और हम सभी जानते हैं कि यह दौर मोदी 1.0 और 2.0 का रहा है। इस दौरान टारगेट ओरिएंटेड वर्क प्रेशर बहुत बढ़ा। इसके अलावा रेड, सर्वे और कर आकलन (असेसमेंट) के नियमों निर्देशों में हुए बदलाव भी कारण कहे जा रहे हैं। फेसलेस असेसमेंट, और रेड में दिगर सर्किल के अफसरों को दी गई छूट भी आ
वीआरएस लेने वाले अफसरों का कहना है कि हमसे अधिक मेनेजेरियल (लिपिक वर्गीय)स्टाफ ने या तो नौकरी छोड़ी है या केंद्र, राज्य के अन्य किसी विभागों को ज्वाइन किया है। ताकि गृह राज्य या शहर में नौकरी की जा सके। स्टाफ की कमी की ही वजह से आयकर विभाग आईटीआर जमा करने से लेकर कर वसूली तक सब कुछ ऑनलाइन कर चुका है। कहीं भविष्य में डिजिटल अरेस्ट की तरह रेड भी ऑनलाइन न हो जाए।
कुछ नामों पर अभी भी पेंच
राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति के लिए मंगलवार को दिल्ली में बैठक हुई। बैठक में 14 रिक्त पदों के लिए डीपीसी हुई। यह पहला मौका है जब एक साथ इतनी संख्या में पद रिक्त हुए हैं, और इसके लिए डीपीसी हुई है। सोशल मीडिया पर अफसरों की एक सूची भी जारी हुई, जिनको लेकर यह दावा किया गया कि ये सभी पदोन्नत हुए हैं। डीपीसी के बाद डीपीसी की अनुशंसा के लिए फाइल सीएम तक आती है। सीएम के हस्ताक्षर के बाद फिर फाइल डीओपीटी को भेजी जाती है, और सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधिवत अधिसूचना जारी होती है।
इन प्रक्रियाओं में पखवाड़े भर का समय लग सकता है। डीपीसी तो 14 पदों के लिए हुई थी। इसके लिए 57 नाम विचरण जोन में थे। वरिष्ठताक्रम में सबसे ऊपर संतोष देवांगन का नाम था, जो पहले जांच के घेरे में थे। उन्हें क्लीनचिट मिलने के बाद भी पदोन्नति नहीं मिल पाई। अलबत्ता, उनसे जूनियर कई अफसरों को आईएएस अवार्ड हो चुका है। संतोष देवांगन ने कैट का दरवाजा खटखटाया था। चर्चा है कि इस बार उनके नाम पर मुहर लग गई है।
कुछ इसी तरह का मामला हिना अनिमेश नेताम का भी रहा है। सबसे उत्सुकता सौम्या चौरसिया की पदोन्नति को लेकर थी। स्वाभाविक है कि वो जेल में बंद हैं, और उनके खिलाफ कई तरह की जांच चल रही है। ऐसे में उनकी पदोन्नति असंभव थी। मगर चर्चा यह भी रही कि उन्हें अपात्र घोषित किया गया है। अपात्रता की स्थिति में उनके लिए पद नहीं रोका जाता, और जूनियर को पदोन्नति का मौका मिल जाता है। मगर सिर्फ जांच लंबित बताए जाने पर संबंधित के लिए पद रोका जाता है, और जांच खत्म होने पर पदोन्नति मिल जाती है। कुछ और अफसरों के खिलाफ गंभीर जांच चल रही है।
चर्चा तो यह भी है कि एक-दो ने अपने खिलाफ जांच को खत्म करवाने में सफलता प्राप्त कर ली है। वरिष्ठता क्रम में जिन नामों पर विचार हुआ है उनमें संतोष देवांगन, हिना नेताम, अश्वनी देवांगन, डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, आशुतोष पाण्डेय, रीता यादव, लोकेश कुमार, आरती वासनिक, प्रकाश कुमार सर्वे, गजेन्द्र सिंह ठाकुर, तनूजा सलाम, लीना कोर्राम, तीर्थराज अग्रवाल, अजय कुमार अग्रवाल, सौमिल रंजन चौबे आदि के नाम की चर्चा है। अब किनके नाम पर मुहर लगी है यह तो अधिसूचना जारी होने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल तो कयास ही लग रहे हैं।
ऐसा होगा स्वागत द्वार

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सांस्कृतिक गतिविधियों और फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा की है। इस परियोजना के तहत केंद्र सरकार ने भी 95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने प्रस्तावित फिल्म सिटी के स्वागत द्वार का एक डिजाइन भी जारी कर दिया है।
चित्रोत्पला’ नाम ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह महानदी का ही प्राचीन नाम है, जिसे महानंदा और नीलोत्पला नाम से भी जाना जाता था। महानदी का उद्गम स्थल छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र के श्रृंगी पर्वत में है। राज्य बनने के दो दशक बाद फिल्मसिटी के लिए एक गंभीर कोशिश हुई है। उम्मीद की जानी चाहिए इससे पर्यटन और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
2897 शिक्षकों का भविष्य अधर में
राज्य में बीएड डिग्रीधारी 2897 शिक्षकों का भविष्य हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित हो सकता है। यदि सरकार कोर्ट के निर्णय पर अमल करती है, तो इन शिक्षकों को हटाकर डीएलएड डिग्रीधारकों को मेरिट के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। यह स्थिति उन शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, जो 14 माह से सेवा में हैं।
याद होगा, 2003 की पीएससी परीक्षा में भी गड़बड़ी हुई थी, जिसे हाईकोर्ट ने प्रमाणित करते हुए नई सूची बनाने का निर्देश दिया था। मगर, प्रभावित अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया, जिससे मामला लटका हुआ है। इस बीच, कई प्रभावित अफसर प्रमोशन पाकर आईएएस बन चुके हैं और कुछ कलेक्टर पद पर कार्यरत हैं।
बीएड शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि उनका चयन भी मेरिट के आधार पर कड़ी प्रतियोगिता के बाद हुआ था। पिछली सरकार की तकनीकी त्रुटि के कारण अब उनकी नौकरी पर संकट आ खड़ा हुआ है।
गौरतलब है कि प्रदेश में 33,000 शिक्षकों की भर्ती के लिए जून में एक परिपत्र जारी हुआ था, लेकिन संभवत: वित्त विभाग की मंजूरी न मिलने से प्रक्रिया रुकी हुई है। बीएड शिक्षक इन रिक्त पदों पर नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। फिलहाल, वे आंदोलन कर रहे हैं। कांकेर में प्रदर्शन कर उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और अपनी नौकरी बचाने की गुहार लगाई।


