राजपथ - जनपथ
नया रायपुर बसने की ओर
बरसों तक वीरान रहे नवा रायपुर में बसाहट तेजी से हो रही है। नवा रायपुर अब मंत्री-अफसरों की पहली पसंद बनते जा रहा है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम तो वहां शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं। दो और मंत्री भी जल्द नवा रायपुर में शिफ्ट होने वाले हैं। इससे परे नवा रायपुर की ऑफिसर्स कॉलोनी भी गुलजार हो रही है। दर्जनभर से अधिक अफसर वहां शिफ्ट हो चुके हैं।
नवा रायपुर के सेक्टर-18 स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी सर्व सुविधा युक्त है। यहां का बंगला, देवेन्द्र नगर के ऑफिसर्स कॉलोनी की तुलना में काफी बड़ा है। कई अफसरों ने तो बंगले में अतिरिक्त साज सज्जा कराई है। यही नहीं, हरेक बंगले में डीजी-सेट लगाए जा रहे हैं। ताकि बिजली गुल होने की स्थिति में बंगले की रौशनी बनी रहे।
जो अफसर वहां शिफ्ट हुए हैं, उनमें एसीएस सुब्रत साहू, रिचा शर्मा, अलरमेल मंगाई डी, सोनमणि बोरा, पुष्पेंद्र मीणा, चंदन कुमार, सारांश मित्तर, आर संगीता, कुलदीप शर्मा, ऋतुराज रघुवंशी, श्यामलाल धावड़े, अभिजीत सिंह, नूपुर राशि पन्ना, सीआरपीएफ के डीआईजी शशिप्रकाश सिंह, और निलंबित आईपीएस सदानंद कुमार हैं। मंत्रालय, विभागाध्यक्ष भवन नजदीक होने के कारण भी नवा रायपुर का बंगला अफसरों को रास आ रहा है।
बड़े-बड़ों पे एफआईआर
सरगुजा के बड़े कारोबारियों में हलचल मची हुई है। वजह यह है कि अंबिकापुर तहसीलदार ने पुलिस ने चार बड़े कारोबारियों के खिलाफ एफआईआर कराई है। कारोबारियों पर आरोप है कि उन्होंने राजस्व मंडल के आदेशों में छेड़छाड़ कर जमीन की अफरा-तफरी की कोशिश की।
आरोपियों में राजपुर के अशोक अग्रवाल भी हैं, जिनके यहां कुछ समय पहले ईडी ने दबिश भी दी थी। अशोक सरकारी विभागों के बड़े सप्लायर हैं, और कॉन्ट्रेक्टर भी हैं। उनकी दोनों ही प्रमुख दल भाजपा, और कांग्रेस में गहरी पैठ रही है। कलेक्टर के निर्देश पर एफआईआर हुई है, तो कारोबारियों में हडक़ंप मचा हुआ है।
यह बात भी सामने आ रही है कि पहले भी राजस्व मंडल के आदेशों में छेड़छाड़ कर कई और लोगों ने जमीन की अफरा-तफरी की है। पिछली सरकार में जमीन की अफरा-तफरी के प्रकरण में अमरजीत भगत के करीबी लोगों के खिलाफ एफआईआर भी हुआ था। ताजा मामला सामने आने के बाद कई और नए प्रकरण आ सकते हंै।
सीमेंट सिंडिकेट की मुनाफे की रेस
मॉनसून की वापसी की आहट होते ही कंस्ट्रक्शन का काम रफ्तार पकड़ रहा है। इधर सीमेंट कंपनियों ने एक साथ प्रति बैग सीमेंट की कीमत 50 रुपये बढ़ा दी है। 3 सितंबर से पहले जो सीमेंट 260 रुपये में मिल रहा था अब 310 रुपये का हो गया है। सरकारी प्रोजेक्ट के लिए दिए जाने वाले सीमेंट की कीमत भी 50 रुपये बढ़ाई गई है। जो लोग मकान बना रहे हैं, उन पर रेत के बाद यह दोहरा बोझ है। खनिज विभाग न तो रेत की कीमतों पर लगाम लगा सकी, न ही उसके अवैध भंडारण और परिवहन पर। दिखावे के लिए जब्ती की दो चार कार्रवाई होती है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कम से कम सीमेंट के मामले में आवाज उठाई है। उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री से, बल्कि प्रतिस्पर्धा आयोग से भी इसकी शिकायत की है। अग्रवाल सत्तारूढ़ दल के एक वरिष्ठ नेता हैं। देखना यह है कि उनकी बात का कहां तक असर होता है। हो सकता है, वृद्धि में 10-20 रुपये की कमी कर दी जाए, फिर भी मुनाफा तो सीमेंट कंपनियों का ही होगा। हाल ही में केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए छत्तीसगढ़ को राशि दी है। इसके चलते एकाध महीने के भीतर ही आवासों के निर्माण में रफ्तार दिखाई देगी। मगर, यह रफ्तार धीमी हो सकती है। आवासहीनों का बजट बिगड़ सकता है।
विनाश रोकने की नन्ही सी कोशिश

हसदेव में नए कोल ब्लॉक में खनन शुरू करने के लिए पेड़ों की कटाई फिर शुरू हो गई है। यहां के आदिवासी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। आज जो लोग हसदेव को बचाने के लिए जो लोग सडक़ पर हैं उनकी आधी जिंदगी शायद बीत चुकी हो। पर, इन तख्तियां थामे बच्चों को बचपन से ही विनाश देखना पड़ रहा है।


