राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : साख की लड़ाई साख से !
05-Sep-2024 5:30 PM
राजपथ-जनपथ : साख की लड़ाई साख से !

साख की लड़ाई साख से !

सरगुजा संभाग के एक जिले के भाजपा विधायकों में गजब की एकता देखने को मिल रही है। ये तीनों विधायक एक राय होकर तबादले का प्रस्ताव देते हैं। ये अलग बात हैं कि तबादला प्रस्तावों को महत्व नहीं मिलने पर ये विधायक नाखुश भी हैं।

बताते हैं कि विधायकों ने पहले कलेक्टर को हटाने पर जोर लगाया था। इसमें सफलता नहीं मिली, तो डीएफओ को हटाने के लिए चि_ी लिख दी। डीएफओ को लेकर जानकारी जुटाई, तो पता चला कि डीएफओ ईमानदार हैं, और नियमों का सख्ती से पालन करते हैं। इसके बाद विधायकों की अनुशंसा को नजरअंदाज कर दिया गया।

विधायक ने फिर जिला शिक्षा अधिकारी के तबादले की सिफारिश की, लेकिन उन्हें भी नहीं बदला गया। जानकारों कहना है कि विधायकगण जिन अफसरों को हटाने की अनुशंसा कर रहे हैं, वो सभी अच्छी साख के हैं। यही वजह है कि विधायकों की अनुशंसाओं को दरकिनार कर लिया जा रहा है। हाल यह है कि तबादलों के चक्कर में विधायक अपनी साख खराब कर रहे हैं।

यूनिवर्सिटी को एक काबिल मिला

एनआरडीए के चेयरमैन एसएस बजाज ने अपने इस्तीफा देने बाद निजी क्षेत्र की तरफ रुख कर लिया है। बजाज को नया रायपुर बसाने का श्रेय दिया जाता है। रिटायर होने के बाद पिछली सरकार ने बजाज को एनआरडीए का चेयरमैन बनाया था।

साय सरकार ने उनकी सेवाएं यथावत रखीं। मगर उन्होंने 31 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सरकार ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है।

आईएफएस के 88 बैच के अफसर बजाज ने अब रावतपुरा निजी विश्वविद्यालय ज्वाइन कर लिया है। यहां रिटायर्ड आईएफएस डॉ. जितेन्द्र उपाध्याय पहले से ही हैं। वो रावतपुरा संस्थान के कर्ताधर्ता हैं। रावतपुरा संस्थान का मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो गया है और और इसको मान्यता भी मिल गई है। ऐसे में संस्थान को बजाज के रूप में एक काबिल अफसर मिल गया है।

मोर्चा से अलग होगा मंत्रालय संघ

सिर मुंडाते ओले पड़े, डीए और एरियर्स को लेकर कर्मचारी संगठनों  के बीच यही स्थिति हो गई है। प्रदेश भर के डेढ़ सौ से अधिक अलग अलग संघ एक होकर दो बड़े संगठन बनाए। एक फेडरेशन और दूसरा संयुक्त मोर्चा। साय सरकार के खिलाफ यह पहले आंदोलन को लेकर दोनों ने हड़ताल का चरणबद्ध पर आगे बढ़ रहे । दो खेमे में एक तोडऩा किसी भी सरकार के लिए आसान काम है। कल हुआ भी ऐसा। मोर्चा नेता कल सीएम से मिलने बुलाए गए और फिर वही आश्वासन देकर सरकार 9 तारीख का सामूहिक अवकाश का विरोध तुड़वाने में सफल रही। मोर्चे के इस फैसले पर सबकी नजर इसलिए भी रही कि इसमें मंत्रालय कर्मचारी संघ भी शामिल है। अब कहानी यहीं से शुरू होती है । इस फैसले पर मंत्रालयीन कर्मचारी अपने ही अध्यक्ष पर बिफर रहे हैं। और अध्यक्ष भी सहमत नहीं। अध्यक्ष को सफाई देते नहीं बन रहा।

उनका भी कहना है कि सीएम का आश्वासन उतना ठोस नहीं लगा,कि हड़ताल वापसी का निर्णय लिया जा सके। ऐसा ही आश्वासन डेढ़ माह पहले वित्त मंत्री दे चुके थे। उस पर क्या हुआ यह सबके सामने है। इसलिए वापसी के निर्णय से सहमति नहीं दी। और अचानक मोर्चा प्रमुख ने घोषणा कर दी। इसके बाद मंत्रालय कर्मचारी वाट्सएप पर अपने अध्यक्ष और मोर्चे की राजनीति पर लानत भेज रहे। यह देख अपनी स्थिति स्पष्ट करने अध्यक्ष ने दोपहर गेट मीटिंग बुला ली। सबका दबाव रहा तो मंत्रालय संघ, संयुक्त मोर्चा से अलग हो सकता है । उधर फेडरेशन को मोर्चे की फूट का इंतजार है। फेडरेशन के वाट्सएप ग्रुप में मोर्चा के खिलाफ काफी कुछ कहा जा रहा है।

ये लोग आंदोलन/प्रदर्शन/हड़ताल कि मात्र घोषणा बस करते है और डेट नजदीक आने पर चर्चा का बहाना करके हड़ताल वापस ले लेते है। ये इन लोगो की पुरानी  परंपरा है जैसे मैसेज हे रहे हैं। इनका दावा है कि   फेडरेशन के बैनर तले ही सब कुछ संभव हो पाएगा।

बस 15 दिन की बात और

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 20 मई को सरकार को आदेश दिया था कि पिछले 6 साल से लंबित पुलिस भर्ती के रुके परिणाम जारी कर सफल प्रतिभागियों को नियुक्ति पत्र दिया जाए। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को लगा था कि उन्होंने लड़ाई जीत ली। आज साढ़े तीन माह यानि 105 दिन हो रहे हैं, सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है, जबकि मियाद 15 दिन पहले खत्म हो चुकी है। उनके घर पर सैकड़ों सफल अभ्यर्थी पहुंच गए, जमीन पर जाकर बैठ गए। मंत्री जी भी उनके साथ जमीन पर बैठे। उनका कहना है कि 370 उम्मीदवारों का चयन और किया जाना है, जिसकी प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। 10 दिन ज्यादा से ज्यादा 15 दिन में नियुक्ति आदेश जारी कर दिया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया सन् 2017 में शुरू हुई थी। तब भाजपा की सरकार थी। इसके बाद पूरे पांच साल कांग्रेस की सरकार रही, तब भी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इस बीच जितने भी गृह मंत्री हुए, किसी ने भी नहीं कहा कि भर्ती रद्द की जाएगी। हर किसी ने आश्वस्त किया। किसी ने दो माह, किसी ने तीन माह का समय लिया। अब उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्री कह रहे हैं कि 15 दिन में नियुक्ति कर दी जाएगी। मगर धरने पर बैठे कई अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्हें बार-बार आश्वासन मिल चुका है। हम 15 दिन इंतजार और कर लेंगे। वरना, फिर आकर इसी तरह बैठेंगे। यदि गृह मंत्री का आश्वासन पूरा हो जाता है तो मौजूदा भाजपा सरकार की यह किसी भी सरकारी नौकरी में पहला नियुक्ति आदेश होगा। ([email protected])


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