राजपथ - जनपथ

महादेव का तांडव
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी केस की वजह से पुलिस महकमे में हलचल मची है। ईडी ने जब से एएसआई चन्द्रभूषण वर्मा को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू किया है, रोज सोशल मीडिया पर पुलिस अफसरों से पूछताछ होने की खबर उड़ रही है।
मीडिया में यह खबर आई कि वर्मा से पूछताछ के आधार पर दो आईपीएस अफसरों को समंस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। हालांकि ईडी के वकील डॉ.सौरभ पांडे ने ‘छत्तीसगढ़’ से अनौपचारिक चर्चा में इस तरह की खबरों को बेबुनियाद करार दिया है। डॉ.पांडे ने सिर्फ इतना ही कहा कि चन्द्रभूषण वर्मा से जो भी पूछताछ हो रही है, वह रिकॉर्ड है।
इन सबके बीच चार आईपीएस, दो एएसपी, आधा दर्जन टीआई, और दुर्ग पुलिस के नौजवानों का नाम भी इस केस में आने का हल्ला उड़ा है। जो कि कथित तौर पर ‘महादेव’ के हितग्राही रहे हैं। हालांकि ईडी ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन देर सबेर नाम सामने आने की बात हो रही है। इन सब चर्चाओं में सच्चाई भले ही न हो, लेकिन चंद्रभूषण वर्मा की गिरफ्तारी से पुलिस और सट्टेबाजों के बीच गहरे रिश्ते की पुष्टि हुई है। राज्य पुलिस पहले भी अपने एक-दो छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर चुकी है।
न सिर्फ पुलिस, और राजनेता बल्कि मीडिया जगत के लोगों को भी ‘महादेव’ का प्रसाद मिलता रहा है। बताते हैं कि ‘महादेव’ के संचालकों ने सालभर पहले तो सिर्फ अखबारों के विज्ञापन पर ही करीब दो करोड़ रुपए फूंके थे। नामी-गिरामी पत्रकारों को भी अविश्वसनीय रक़म दी गई थी। और जब भिलाई-दुर्ग के कई युवाओं को सट्टेबाजी के चक्कर में दुबई और अन्य खाड़ी देशों में जाने की खबर सामने आई, तो इसके बाद ही छापेमारी का दौर चला, जो अब तक जारी है।
हार-जीत का दांव लगना शुरू
कुछ कांग्रेस विधायकों की टिकट रिपीट नहीं होने को लेकर कुछ लोग इतने आश्वस्त हैं कि लाखों रुपए की शर्त भी लगा रहे है। मनेंद्रगढ़ को लेकर सोशल मीडिया पर किया गया एक ऐलान कुछ इस तरह से है- मनेंद्रगढ़ में एक उत्साही व्यापारी हैं। उनका दावा है कि डॉ. विनय जायसवाल की टिकट कट चुकी है। सिर्फ औपचारिकताएं शेष हैं। इसके लिए वे 5 लाख रुपये की शर्त लगाने के लिए तैयार हैं शर्त की रकम दोनों पक्ष तटस्थ व्यक्ति के पास पहले से जाम कराएंगे। कुल राशि में दो या तीन या अधिक भागीदार हो सकते हैं। इच्छुक खास समर्थक व्यक्तिगत तौर पर हमसे संपर्क करें। संपर्क स्थल 9 बजे। स्थान बलराम चाय दुकान, राजस्थान भवन के साने, मनेंद्दगढ़।
खफा पूर्व मंत्री
भाजपा के दो पूर्व मंत्री इन दिनों पार्टी संगठन से खफा चल रहे हैं। एक पूर्व मंत्री तो विधायक हैं, लेकिन जिले के संगठन ने उनकी जगह नए चेहरे को टिकट देने की वकालत कर दी है। इससे पूर्व मंत्री गुस्साए हैं। दूसरे का हाल तो और खराब है।
बताते हैं कि दूसरे पूर्व मंत्री तो पिछला चुनाव हार गए थे। उन्हें सीट बदलकर चुनाव लडऩे की सलाह दी गई है, जिसके लिए वो तैयार नहीं है। अपने कुछ करीबी लोगों से कह दिया है कि उनकी सीट बदली गई, तो वो चुनाव नहीं लड़ेंगे। यही नहीं, वो पार्टी का प्रचार भी नहीं करेंगे। देखना है कि दोनों पूर्व मंत्रियों को लेकर पार्टी क्या कुछ करती है।
बाहर जाकर महत्व
छत्तीसगढ़ कैडर के एक और आईएएस को महत्वपूर्ण पोस्टिंग मिली है। आईएएस के वर्ष-2006 बैच के अफसर एलेक्स पाल मेनन को चेन्नई में विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) का संयुक्त विकास आयुक्त बनाया गया है।
मेनन अपने गृह राज्य तमिलनाडु में प्रतिनियुक्ति पर हैं। वो सुकमा कलेक्टर रहते नक्सलियों द्वारा बंधक बनाए गए थे। बाद में सामाजिक कार्यकर्ताओं, और सरकार के प्रयासों से उन्हें रिहाई मिली। इसके बदले में कुछ नक्सलियों को भी छोड़ा गया था। बावजूद इसके मेनन को रमन सरकार में अच्छी पोस्टिंग मिलती रही है। कांग्रेस सरकार के आने के बाद एक तरह से किनारे ही थे, लेकिन बाद में वो प्रतिनियुक्ति पर चले गए।
गैरहाजिर रहने से बच गई कुर्सी
यह देखा गया है कि संसद में किसी प्रस्ताव से किसी दल की प्रतिष्ठा जुड़ी हो तो वह अपने सदस्यों से हर हाल में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी करता है। नगरीय निकायों में अभी यह बाध्यता नहीं है। छत्तीसगढ़ के कई नगर पालिकाऔ, नगर पंचायतों में कांग्रेस, भाजपा के बगावती मिलकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को पद से हटा चुके हैं। इधर जगदलपुर नगर निगम की महापौर सफीरा साहू के खिलाफ लाये गए भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव को ध्वस्त करने के लिए कांग्रेस ने अनूठी रणनीति अपनाई। तय समय पर मंगलवार को सभा बुलाई गई, लेकिन उसमें कांग्रेस के पार्षद पहुंचे ही नहीं। यदि कांग्रेस पार्षदों को यह निर्देश दिया जाता कि वे सभा में भाग लें और अविश्वास प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान करें तो दो चार के इधर-उधर होने की आशंका को कौन टाल सकता था? तय यह किया गया कि कोई सभा में पहुंचेगा ही नहीं। इससे हुआ यह कि कांग्रेस एकजुट दिखी, यदि किसी का बगावत करने का ख्याल भी रहा होगा तो वह पूरा नहीं हो सका। इधर कोरम के अभाव में सभा आधे घंटे स्थगित की गई। भाजपा के सभी 19 पार्षद मौजूद थे, पर कोरम पूरा करने के लिए कुल 33 की जरूरत थी। सभा निरस्त कर दी गई। भाजपा पार्षदों ने सभा की नई तिथि तय करने की मांग की, पर कलेक्टर ने नियमों का हवाला देते हुए इससे मना कर दिया। सामान्य सभा के लिए जो समय तय किया था, उस वक्त जगदलपुर से सारे कांग्रेस पार्षद राजधानी रायपुर के लिए निकल चुके थे। यहां उन्होंने सीएम से मुलाकात की।
राष्ट्रपति के लिए नए प्रोटोकॉल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पहले छत्तीसगढ़ दौरे पर किए गए कुछ इंतजाम अभूतपूर्व हैं। कोविड महामारी का दूर-दूर तक असर नहीं है लेकिन ऐहतियात बरतने के लिए उनके आसपास जो भी पहुंचेगा उनका आरटीपीसीआर टेस्ट जरूरी है। बिलासपुर में वे महामाया रतनपुर का दर्शन करेंगी और गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगीं। जैसी की जानकारी मिली है कि जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारी, विश्वविद्यालय में स्वागत करने वाले विजिटर और कुलपति सहित प्राध्यापक का आरटीपीसीआर टेस्ट कराया गया है। इसके अलावा जिन विद्यार्थियों को पदक और डिग्री दी जानी है, उनकी भी आरटीपीसीआर टेस्ट को जरूरी किया गया है। ऐहतियात बरतने में बुराई क्या है, पर ध्यान देने की बात है कि वीवीआईपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास पर प्रोटोकॉल में यह शामिल नहीं था।
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में इसके पहले राष्ट्रपति रहते हुए ज्ञानी जैल सिंह, एपीजे अब्दुल कलाम और रामनाथ कोविंद आ चुके हैं। मीडिया के लिए जगह निर्धारित थी, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि आमंत्रित किए जाते थे। इस बार स्थानीय मीडिया को आमंत्रण नहीं है। राष्ट्रपति का करवेज करने के लिए पीआईबी, आकाशवाणी, दूरदर्शन, पीटीआई, यूएनआई और एएनआई को ही बुलाया गया है। इनकी भी संख्या सीमित रखी गई है। कैमरामैन या वीडियो जर्नलिस्ट को प्राथमिकता दी गई है। बाकी के लिए दर्शक दीर्घा में भी जगह नहीं है।
कोविंद के कार्यक्रम में अतिथि के रूप में स्थानीय सांसद, विधायकों का नाम शामिल था। वे मंच पर भी पीछे की ओर बैठे थे लेकिन इस बार राष्ट्रपति के अलावा केवल दो नाम हैं- राज्यपाल और मुख्यमंत्री।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम में वैसे भी अखबार और टीवी चैनल के रिपोर्टरों को कोई ब्रेकिंग न्यूज नहीं मिलती। पर स्थानीय मीडिया को पहली बार बाहर रखने की वजह लोग तलाश रहे हैं। लोगों को याद आ रहा है कि बीते 9 मई को ओडिशा के श्रीराम चंद्र भंजदेव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पूरे 9 मिनट बिजली बंद हो गई थी। सभागार में अंधेरा छा गया। उस वक्त राष्ट्रपति का भाषण चल रहा था। उन्होंने बोलना जारी रखा। जांच कमेटी बैठी और कुछ लोग निलंबित भी किए गए।
ड्रेस कोड का फैसला वापस
अमरकंटक के नर्मदा मंदिर ट्रस्ट ने दर्शन के लिए पहुंचने वाली पुरुषों, महिलाओं और युवतियो के पहनावे को लेकर नोटिस निकाली। इसमें कहा गया कि छोटे वस्त्र, हाफ पेंट, बरमुड़ा, नाइट सूट, मिनी स्कर्ट, कटी-फटी जीन्स आदि अभद्र कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश बंद है। खास तौर पर महिलाओं का जिक्र किया गया कि आदर्श कपड़े, जैसे साड़ी सलवार सूट पहनकर आएं। पर यह नियम सिर्फ 24 घंटे लागू रहा। अगले दिन वापस ले लिया गया। पोस्टर उतार लिए गए। मंदिर ट्रस्ट ने निर्देश वापस लेने का कोई कारण नहीं बताया है।
(rajpathjanpath@gmail.com)