राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 7 जून। राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र के चुनावी नतीजों से कांग्रेस और भाजपा के विधायकों के क्षेत्र में लीड कम होने पर उन्हें झटका लगा है। खासतौर पर कांग्रेस के तीन विधायकों दलेश्वर साहू, हर्षिता बघेल और यशोदा वर्मा की अपने इलाके में पकड़ कमजोर नजर आई है। वहीं पंडरिया की भाजपा विधायक भावना बोहरा के लिए भी नतीजा हैरान करने वाला रहा। भावना बोहरा के विधानसभा में कांग्रेस प्रारंभ से लेकर अंत तक मतचक्रम में बढ़त लिए रही, जबकि भाजपा को इस सीट से अच्छी बढ़त की उम्मीद थी।
बताया जा रहा है कि पंडरिया में मिली पार्टी को शिकस्त से संतोष पांडे की लीड कम हो गई। इस बीच राजनांदगांव जिले की दो विधानसभा डोंगरगांव और डोंगरगढ़ में कांग्रेस की जड़ें कमजोर नजर आई। डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू और डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल के क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार भूपेश बघेल को तगड़ा झटका लगा है। दोनों सीट पर क्रमश:17 हजार और 10 हजार मतों से कांग्रेस पीछे रह गई। वहीं खैरागढ़ विधायक यशोदा वर्मा के क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। कांग्रेस भाजपा के मुकाबले 5959 मतों से पिछड़ गई। नतीजतन बघेल अपनी हार बचा नहीं पाए। राजनीतिक हल्के में इस परिणाम को विधायकों के कार्यप्रणाली की लिहाज से काफी नुकसानदेही माना जा रहा है। राजनांदगांव जिले से एकमात्र खुज्जी विधायक भोलाराम साहू अपनी राजनीतिक ताकत को बरकरार रखने में कामयाब रहे।
खुज्जी से कांग्रेस ने लगभग 15 हजार मतों की लीड़ ली। भाजपा इस सीट से लगातार विधानसभा और लोकसभा में पिछड़ती रही है। अच्छे प्रदर्शन के कारण इस सीट को अब कांग्रेस की परंपरागत सीट माना जा रहा है। कांग्रेस के तीन विधायकों ने राष्ट्रीय नेतृत्व को निराश किया है।
डोंगरगांव और खुज्जी से दलेश्वर और भोलाराम तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। जबकि यशोदा खैरागढ़ से दूसरी और हर्षिता बघेल पहली मर्तबा विधानसभा पहुंची है। खुज्जी विधायक ने अपने क्षेत्र में पार्टी की जीत का परचम लहराया। बाकी विधायकों के प्रदर्शन से कांग्रेस को जोरदार झटका लगा। हालांकि लोकसभा चुनाव केंद्र के मुद्दों पर होते हैं, लेकिन विधायकों की परीक्षा की भी घड़ी होती है। ऐसे में इस चुनाव नतीजे से कांग्रेस-भाजपा के चारों विधायकों को झटका लगा है।
आदिवासियों ने खूब लुटाया कांग्रेस पर प्यार
संसदीय क्षेत्र की एकमात्र आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीट मोहला-मानपुर में आदिवासी मतदाताओं ने कांग्रेस पर खूब प्यार लुटाया। एकतरफा कांग्रेस ने यहां जीत हासिल कर भाजपा को टिकने नहीं दिया। इंद्रशाह मंडावी जहां विधानसभा में 31 हजार मतों से जीत हासिल की थी। वहीं लोकसभा में 40 हजार मत कांग्रेस के पक्ष में डाले गए। नतीजतन कांग्रेस को यहां अच्छी बढ़त मिली, लेकिन संसदीय क्षेत्र के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में मिली शिकस्त के कारण कांग्रेस हार गई। इंद्रशाह मंडावी की राजनीतिक पकड़ भी इस परिणाम से मजबूत हुई है। यानी आदिवासी बाहुल्य सीट पर कांग्रेस की जमीनी पकड़ भाजपा की तुलना में काफी मजबूत है।
रमन की छवि से पांडे को एकतरफा फायदा
भाजपा प्रत्याशी संतोष पांडे की पुन: बतौर सांसद ताजपोशी के पीछे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की छवि काफी असरकारक रही। एक वक्त गिनती में पांडे भूपेश से पीछे चल रहे थे। जैसे ही राजनांदगांव विधानसभा की गिनती शुरू हुई, फिर पांडे ने पीछे नहीं देखा। विस अध्यक्ष डॉ. सिंह ने भी अपने राजनीतिक अनुभव की बदौलत पांडे के पक्ष में माहौल बनाया था। राजनांदगांव विधानसभा से भाजपा को एकतरफा 57 हजार वोट मिले। यही वोट पांडे की जीत की राह को प्रशस्त किया। बताया जा रहा है कि रमन के बदौलत पांडे ने कड़े टक्कर में कांग्रेस प्रत्याशी को पटखनी दी। ऐसे में राजनांदगांव विधानसभा के परिणाम ने पांडे का एक तरह से राजनीतिक उद्धार किया।


