राजनांदगांव

कर्मों का फल स्वयं भोगना पड़ता है-संत प्रभाकर साहेब
12-Jan-2026 6:11 PM
कर्मों का फल स्वयं भोगना पड़ता है-संत प्रभाकर साहेब

अपना सुधार ही  सबसे बड़ी सेवा है
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 12 जनवरी।
ग्राम बोगाटोला में चल रहे त्रिदिवसीय कबीर सत्संग समारोह के दूसरे दिन विशाल श्रद्धालु सभा के बीच संतों ने मानव जीवन में सुधार, सद्कर्म, सत्संग और सामाजिक जिम्मेदारी पर प्रेरक उपदेश दिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग उपस्थित रहे और संतवाणी का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ लिया।

कबीर वाणी के राष्ट्रीय प्रचारक संत प्रभाकर साहेब ने अपने प्रवचन में कहा कि अपना सुधार ही सबसे बड़ी सेवा है। यदि हम समाज में बदलाव देखना चाहते हैं तो पहले स्वयं और अपने परिवार से शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज लोग भलाई के कार्यों में भी अपना लाभ ढूंढने लग गए हैं, यह स्वयं के लिए भी नुकसानदायक है क्योंकि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल स्वयं भोगना पड़ता है। इसलिए हर कार्य निष्ठा, ईमानदारी और सत्मन से करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जैसे देश की रक्षा का कार्य जवान और किसान करते हैं, उसी प्रकार समाज में शांति, जागरूकता और नैतिकता की रक्षा का कार्य संत करते हैं। संत बिना शस्त्र उठाए समाज में शांति की स्थापना करते हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले स्कूलों में संत वाणी पढ़ाई जाती थी, जिससे बच्चों में चरित्र, नैतिकता और मानवीय मूल्य विकसित होते थे, परंतु आज इसे सिलेबस से हटाया जा रहा है, जो युवा पीढ़ी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। समय रहते सुधार नहीं हुआ तो युवा वर्ग भ्रमित हो जाएगा।

संत गुरुबोध साहेब ने कहा कि सत्संग हमें होश और जागरूकता के साथ जीवन जीने की कला सिखाता है। यदि जीवन में विवेक हो तो कोई भी काम अधूरा नहीं रहता। संसार की हर वस्तु उपयोगी है, बस उसका सही उपयोग जानना चाहिए। सदुपयोग वरदान और दुरुपयोग अभिशाप है, इसलिए मनुष्य को अपने समय, धन, संबंधों और संसाधनों का सदुपयोग करना चाहिए।

संत सुबोध साहेब ने कहा कि सत्संग मात्र धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। सत्संग से विचार बदलते हैं, विचारों से कर्म बदलते हैं और कर्मों से पूरा जीवन बदल जाता है। संतों के मार्गदर्शन से जुड़ा व्यक्ति उज्ज्वल और अनुशासित जीवन प्राप्त करता है।
समारोह के दौरान भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने संतवाणी सुनकर जीवन में सुधार और सद्मार्ग अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम क्रमबद्ध रूप से जारी है। सोमवार को प्रात: 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक सत्संग, भजन एवं गुरु पूजन का आयोजन होगा, इसके पश्चात दोपहर 3 बजे से चौका आरती के साथ समारोह का समापन किया जाएगा।


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