रायपुर
रायपुर, 26अगस्त। छत्तीसगढ में खाद्य प्रौद्योगिकी के महत्व को देखते हुए राज्य शासन ने खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2020 से प्रारंभ किया है। इस 4 वर्षीय पाठयक्रम के पश्चात बी.टेक. (फूड टेक्नालाजी) की उपाधि प्रदान की जाती है। इस पाठ्यक्रम की प्रति सेमेस्टर फीस लगभग 15 हजार गैर छात्रावास विद्यार्थी हेतु निर्धारित है। फीस इसका सिलेबस भारतीय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.) नई दिल्ली द्वारा अनुमोदित हैं। इस बी.टेक. (फूड टेक्नालाजी) कोर्स की 36 सीटों में प्रवेश हेतु विद्यार्थी को गणित, भौतिक, रसायन विषय के साथ 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य हैं तथा व्यापम छत्तीसगढ द्वारा आयोजित पी.ई.टी. की परीक्षा में प्रावीणता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। वर्ष 2023-24 में इस पाठयक्रम में प्रवेश हेतु ऑनईन काऊंसलिंग प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इच्छुक अभ्यर्थी अधिक जानकारी हेतु 222.द्बद्दद्म1.ड्डष्.द्बठ्ठ का भ्रमण कर सकते हैं। प्रवेश संबंधी जानकारी हेतु 9425525249 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। इस 4 वर्षीय पाठयक्रम के दौरान विद्यार्थियों को खाद्य अभियांत्रिकी, खाद्य प्रौद्योगिकी, खाद्य रसायन, खाद्य माइक्रोबायोलाजी, खाद्य व्यापार प्रबंधन, खाद्य पदार्थो की गुणवत्ता जॉच से संबंधित विषयों को महत्व के अनुसार शिक्षण एवं प्रायोगिक कार्य हेतु अलग-अलग घण्टे निर्धारित किये गये हैं।
अंतिम वर्ष के विद्यार्थीयों को खाद्य प्रौद्योगिकी से संबंधित संस्थानों/केन्द्रों/इंडस्टीज जैसे बेकरी उद्योग, रेडी-टू- ईट फूड, विभिन्न प्रकार के बेवरेजेज, खाद्यान्नों की पिसाई यूनिट, खाद्य तेल से संबंधित उद्योग, फल और सब्जी के विभिन्न मुल्यवर्धित पदार्थ तथा इनकी पैकेजिंग, दुग्ध एवं दुग्ध-निर्मित उत्पाद, अनाज प्रसंस्करण, कन्फेक्शनरी, चॉकलेट, सोया-निर्मित उत्पाद, नमकीन, स्नैक्स, चिप्स, बिस्कुट, तरह तरह के मसाला उद्योग में प्रशिक्षण हेतु अनुलग्न किया जावेगा एवं संतोषजनक प्रशिक्षण के पश्चात विद्यार्थी उपाधि हेतु योग्य होगा। बी.टेक (फूड टेक्नालाजी) स्नातक खाद्य प्रसंस्करण/खाद्य प्रौद्योगिकी संबंधित क्षेत्र के शासकीय/निजी संस्थान/उपक्रम में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं तथा देश/विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों/संस्थानों में उच्च अध्ययन हेतु प्रवेश ले सकते हैं।
छत्तीसगढ प्रदेश में विभिन्न फसलों, सब्जियों, फलों एवं लघु अनाज एवं वनोपज की प्रचुरता को देखते हुए इस प्रदेश में भी खाद्य प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रसंस्करण की तकनीकों का उपयोग करते हुए अनेक प्रकार के डब्बा बंद, प्रसंस्कृत उत्पाद, इंस्टैन्ट/रेडी टू इट प्रकार के खाद्य व्यंजनों का निर्माण आसानी से किया जा सकता हैं। समय की कमी से लोग आज कल डब्बा बंद, प्रसंस्कृत उत्पाद, इंस्टैन्ट/रेडी टू इट प्रकार के खाद्य व्यंजनों को वरीयता दे रहें हैं। फसल और फल सब्जियों का उत्पादन लगातार बढता जा रहा हैं एवं उनकी खपत उस मौसम में न होने के कारण अधिकांश समय कृषकों को हानि की संभावना होती हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिये इन फसलों, फल, सब्जियों में खाद्य प्रौद्योगिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण की तकनीकों का उपयोग करके इनसे मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है जिसे कि गैरमौसमी समयकाल में आसानी से उपयोग किया जा सकता है एवं ऐसा करने से कृषक समुदाय को आर्थिक लाभ आवश्यक रूप से से प्राप्त होगा। इन फसलों से मूल्यवर्धित पदार्थ बनाने से प्रदेश के किसानो, युवाओं, महिला स्व सहायता समूहों को रोजगार प्राप्त करने में भी आसानी होगी।


