रायपुर

शुभ और अशुभ अनुबंध का चक्र चलता रहेगा, हमें इस श्रृंखला को समाप्त करना होगा-शुभंकरा श्रीजी
04-Jul-2023 7:13 PM
शुभ और अशुभ अनुबंध का चक्र चलता रहेगा, हमें  इस श्रृंखला को समाप्त करना होगा-शुभंकरा श्रीजी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 4 जुलाई। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में सोमवार नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि ना किसी से राग और ना ही किसी से द्वेष, समतामय जीवन जीने की कला को जब तक हम अंगीकार नहीं करेंगे तब तक कर्म के अनुबंधों से छुटकारा नहीं मिलेगा। हम धर्म अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करेंगे तो एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी।

इस संसार में जीवनयापन करते हुए समझपूर्वक या नासमझी से हमारे कर्म का अनुबंध चलता ही रहता है। शुभ का अनुबंध तो इस जीव ने कम ही किया होगा किन्तु अशुभ का अनुबंध तो चाहकर भी और न चाहकर भी होता ही रहा, हमें इस अनुबंध की श्रृंखला को ही समाप्त करना है। कर्म बंध तो एक बार प्रायश्चित-प्रश्चाताप से समाप्त हो सकता है किन्तु अनुबंध की श्रृंखला को समाप्त करने हमें स्वयं को दृढ़ संकल्पी होना होगा।

जिस प्रकार एक परीक्षार्थी को कड़ी मेहनत का प्रतिफल मिलता ही है, वैसे ही हम भी अशुभ के ऋणानुबंध को समाप्त करने का भरसक प्रयत्न-पुरूषार्थ करेंगे तो हमें भी सफलता अवश्य मिल जाएगी। किसी ने कुछ कह दिया, किसी ने अपमान या अनुचित व्यवहार कर दिया तो उस बात को मन में गांठ बांध कर रख लेना ही अनुबंध की भव-भव की परम्परा बढ़ाने का कारण बनता है। ऐसे बैर व द्वेष भावों का हमें अंतरमन से निकाला करना ही होगा।

चातुर्मास में करें जीवन की प्लानिंग

साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि चातुर्मास के इन चार महीनों में हमें प्लानिंग करना है। हम शादी के पहले कैसे प्लानिंग करते है। ऐसा तो नहीं होता कि शादी के दिन ही सब तैयारियां हो जाए। शादी की तारीख निकालने की प्लानिंग से लेकर शादी की प्लानिंग, भवन और बैंड-बाजा की बुकिंग, जरूरी सामानों की खरीदारी आदि करते है। ऐसे हम इसलिए करते है ताकि सब काम शादी के दिन आसान हो जाए। 6 महीने तैयारी करने के बाद भव्य समारोह होता है और लोग बहुत अच्छी बातें कहते है, तारीफ करते है। फिर भी उसे सांसरिक सुख नहीं मिलता। साध्वीजी कहती है कि अब इन चार महीने हमें खुश रहने की प्लानिंग करनी है।


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