रायपुर

सर्व आदिवासी समाज समान नागरिक संहिता का विरोध करेगा
04-Jul-2023 2:49 PM
सर्व आदिवासी समाज समान  नागरिक संहिता का विरोध करेगा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 4 जुलाई।
सर्व आदिवासी समाज (रूढिजन्य परंपरा पर आधारित) का विरोध भारतीय लॉ कमिशन ने देश में समान नागरिक संहित (यूसीसी) के लिए पब्लिक नोटिसजारी करते हुए सुझाव मांगे हैं। सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ (रूढिज़न्य परंपरा पर आधारित) अपने सामाजिक रूढि़ प्रथा के अनुरूप अपना मत रख रहे हैं। समान नागरिक संहिता व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानून के रूप में बनने जा रहा है। इसमें उनके जन्म, विवाह एवं संपत्ति के लिए समान कानून बनाने का प्रस्ताव है।

आदिवासी समाज की लगभग सभी रीति रिवाज परम्पराएं सामुदायिक एवं कुल की होती है। आदिवासी समुदाय अपने जन्म, विवाह, तलाक, विभाजन, उत्तराधिकारी, विरासत, जमीन एवं संपत्ति के मामले प्रथागत / रूढि़विधि (कस्टमरी लॉ) से संचालित है और यही इनकी पहचान है जो बाकी जाति, समुदाय, धर्म से भिन्न है। आदिवासियों के प्रथागत कानून को संविधान के तहत (अनुच्छेद 13 (3) (क)) कानून का बल दिया गया है। संविधान में आदिवासियों के लिए बहुत सारे अधिनियम प्रावधानित अनुसूची (पांचवी एवं छठी), एक्ट, पेशा एक्ट सहित बहुत सारे अधिकार दिए गए हैं।

पूर्व केंद्रीय  मंत्री अरविंद नेताम, एसएएस  के कार्यकारी अध्यक्ष  बी.एस. रावटे,विनोद नागवंशी ने प्रेस वार्ता में कहा कि समान नागरिक संहिता से आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट प्रथा परम्परा जो सदियों से विद्यमान एवं संचालित है, प्रभावित होगा और आदिवासियों की पहचान के साथ अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। इसलिए सर्व आदिवासी समाज नागरिक संहिता का विरोध करता है।


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