रायपुर
रायपुर, 2 जुलाई। भारतीय जैन संगठना बिलासपुर जोन ईकाई की सक्रियता ने प्रदेश में एक दिव्यांग सेवा शिविर लगाकर गुजराती भवन में आयोजित भारतीय जैन संगठना के स्तूत्य व अनुकुरणीय युवाओं की पहल ने एक नया इतिहास रचा है। जहां लक्ष्य से अधिक लोगों को कृत्रिम अंग की सुविधा देकर चलकर घर भेजा जा रहा है।
वहीं शिविर कल 2 जुलाई तक चलेगा। शिविर बिलासपुर ही कवर्धा सहित कुछ अन्य जिलों के लोगों के साथ ही सीमावर्ती प्रदेश के जिलों के लोग भी शिविर का लाभ लिया। जयपुर पैर के प्रमुख ने पहुंचकर अपनी सेवाएं दी। भारतीय जैन संगठना के लिए स्वयं का भवन, विश्रामगृह व अन्य सुविधा हो इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बिलासपुर में दो एकड़ जमीन कम से कम रियायती दर पर उपलब्ध कराने के लिए अर्जी भी लगाई।
मुख्यमंत्री की व्यवस्ता की वजह से भारतीय जैन संगठना ने अपनी अर्जी कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित करने की दिशा में पहल की। नि:शुल्क दिव्यांग सेवा शिविर के समापन के अवसर पर पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिविर में दिव्यांगों को व्हीलचेयर, ट्राइसिकल, श्रवण संबंधी उपकरण, बैशाखी, कृत्रिम अंग प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने नि:स्वार्थ भाव से कार्य कर रहे संगठन एवं शिविर में सेवा दे रहे सभी चिकित्सकों को साधुवाद दिया। मुख्यमंत्री ने शिविर में मौजूद दिव्यांगों से उनका कुशलक्षेम पूछते हुए सभी को स्वस्थ जीवन के शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक शैलेष पाण्डेय, महापौर रामशरण यादव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव, अरपा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभय नारायण, नगर निगम के सभापति शेख नजरूद्दीन, कलेक्टर सौरभ कुमार सहित श्री विजय पाण्डेय तथा अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे।
गौरतलब है कि भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर एवं रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के सहयोग से भारतीय जैन संगठना एवं गुजराती समाज के सहयोग से यह 6 दिवसीय दिव्यांग शिविर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट एम्बेसडर सतीश मेहता जी रहे। इनके साथ ही रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड से प्रदीप फॉलोज, भारतीय जैन संघठना के राष्ट्रीय सचिव पंकज चोपड़ा, भारतीय जैन संघठना छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष मनोज लुंकड़, भारतीय जैन संघटना छत्तीसगढ़ के प्रदेश महामंत्री विजय गंगवाल मुख्य रूप से मौजूद थे।


