रायगढ़
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 20 अगस्त। जिसने अपने कदमों से केलो नदी के उद्गम स्थल से ओडिशा में महानदी के संगम तक अपनें साथियों के साथ यात्रा कर जीवनी दाहिनी केलो की तकलीफों और नदी पर बढ़ते प्रदूषण पर अपनी रिपोर्ट सरकार और समाज के सामने प्रस्तुत किया था वही केलो यात्री श्रमजीवी पत्रकार, कला समीक्षक, समाजसेवी अजातशत्रु शिव राजपूत अब नहीं रहे। आज उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार पुसौर में किया गया। पत्रकार बिरादरी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
‘आप’ ने दी श्रद्धांजलि
आम आदमी पार्टी नेता रुसेन कुमार ने केलो के सपूत वरिष्ठ पत्रकार शिव राजपूत के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वे अत्यंत गुणी, संवेदनशील और स्थानीय मुद्दों को लेकर सजग व्यक्ति थे। रुसेन कुमार ने याद किया। केलो नदी पर उनकी की गई रिपोर्टिंग आज भी मेरे पास सुरक्षित है। उन्होंने रायगढ़ को गहराई से समझने और लोगों तक पहुंचाने के लिए अनेक कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि शिव राजपूत ने केलो नदी की यात्रा, गुफाओं के शैलचित्रों पर लेखन, भ्रमण, लोक संस्कृति पर अध्ययन जैसे कार्यों से रायगढ़ की पहचान को मजबूत किया। वे शिक्षा के प्रति भी बेहद संवेदनशील थे और नदी के महत्व को गहराई से समझते थे। रुसेन कुमार ने भावुक होकर कहा, यदाकदा निरंतर उनसे फोन पर बात होती रहती थी। जब वे रायगढ़ छोडक़र पुसौर रहने लगे थे, तब उनका लेखन कार्य कम हो गया। लेकिन उनका योगदान रायगढ़ की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेगा।
शिव राजपूत ने ‘दैनिक बयार’ अखबार में ‘केलो के कपूत’ नामक कालम लिखा, जो अत्यंत रोचक, संवेदनशील और सूचनाओं से भरपूर होता था।
उन्होंने रायगढ़ में शिक्षा सुधार, साक्षरता अभियान और जनसम्पर्क कार्यों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।
केलो नदी की यात्रा पर तैयार की गई उनकी पुस्तिका आज भी बहुमूल्य धरोहर है।


