रायगढ़

मरीन ड्राइव प्रकरण हाईकोर्ट पहुंचा
14-Jun-2025 7:11 PM
मरीन ड्राइव प्रकरण हाईकोर्ट पहुंचा

रायगढ़ निगम की कार्रवाई पर लग सकती है रोक 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायगढ़ , 14 जून। वार्ड 29 के कयाघाट, जेलपारा और प्रगति नगर में प्रस्तावित मरीन ड्राइव निर्माण के चलते सैकड़ों मकानों को तोडऩे की तैयारी पर अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की नजर पहुंच गई है।

जानकारी के मुताबिक, इस प्रकरण को लेकर एक याचिका दायर की गई है, जिसमें नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती दी गई है और इसे मानवाधिकारों, आवास के अधिकार और कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन के आधार पर रोकने की मांग की गई है। इससे पहले शुक्रवार को इस क्षेत्र के नाम जोख के लिये पहुंची टीम को स्थानीय निवासियों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा और प्रभावित लोगों ने पैदल मार्च निकालकर निगम व जिला प्रशासन के इस तुगलकी फरमान पर विरोध जताया।

नगर निगम रायगढ़ द्वारा वार्ड 29 क्षेत्र को राष्ट्रीय गंदी बस्ती घोषित करते हुए 12 जून तक घर खाली करने का नोटिस जारी किया गया था। निवासियों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सर्वेक्षण, वैकल्पिक पुनर्वास और जनसुनवाई के यह आदेश दिया गया। इस आदेश से दुखनी बाई भुईंहर की मौत और गंगा बाई बंजारे के मानसिक तनाव में बीमार होने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और सम्मानपूर्वक आवास का अधिकार), सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और शहरी पुनर्विकास नीति का हवाला दिया गया है। यह तर्क भी रखा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई लोगों को मकान स्वीकृत हुए थे, जिन्हें अब ‘अवैध’ कहकर तोड़ा जाना अन्यायपूर्ण है।

मोहल्ले वासियों का कहना है कि उन्हें मरीन ड्राइव निर्माण से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन इसका निर्माण ऐसे किया जाए जिससे बेवजह लोगों के घर न टूटें। उनका आरोप है कि नगर निगम नदी की सीमा को मोहल्ले के अंदर तक बढ़ाकर पेश कर रहा है।

हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख तय होने के बाद प्रशासन को अब अपनी कार्रवाई को कानूनी रूप से सही ठहराना होगा। यह मामला अब सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि जनहित और संवैधानिक अधिकारों की परीक्षा बन गया है।


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