महासमुन्द

विजयनगरम में 26 जनवरी को मनाते हैं गुरु गोविंद सिंह का प्रकाश पर्व
09-Feb-2026 3:12 PM
विजयनगरम में 26 जनवरी को मनाते हैं गुरु गोविंद सिंह का प्रकाश पर्व

- रजिंदर खनूजा

पिथौरा,9 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। देश के दक्षिण में स्थित विजयनगरम (आंध्रप्रदेश) में प्रतिवर्ष 26 जनवरी को ही गुरु गोविंद सिंह का प्रकाश पर्व मनाया जाता है। नगर कीर्तन में इस दिन सबसे आगे तिरंगा होता है, जो कि गुरु की देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है।

आज भी गुरु गोविंद सिंह जी के सेवक व उन्हें हथियार बनाकर देने वाले शिवलकर (लोहार) पंथ गुरुद्वारा में सेवा करते हैं और प्रतिवर्ष गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर नगर कीर्तन भी निकालते हैं। गुरुओं के प्रति इनकी श्रद्धा देखकर अब छत्तीसगढ़ के सिख भी नगर कीर्तन में शामिल होने विजयनगरम जाने लगे हैं। उक्त जानकारी तब मिली, जब ‘छत्तीसगढ़’ प्रतिनिधि अपनी निजी यात्रा पर विशाखापट्टनम गए। वहां सिखों की भारी संख्या देखकर पता लगाया, तो यहाँ की एक अलग ही कहानी पता चली।

जानकारी लेने पर टाटीबंध रायपुर निवासी रिंकू ओबेरॉय ने बताया कि वे 2013 से दक्षिण भारत के इस मशहूर शहर विजयनगरम जाते रहे हैं और वहां के नगर कीर्तन में शामिल होते थे, पर तेलंगाना निर्माण के समय वहां हुए कुछ विवादों के कारण नगर कीर्तन में कुछ व्यवधान की संभावना होती थी, जिसे उन्होंने स्थानीय शिवलकर भाइयों के साथ मिलकर दूर की। अब वहां के स्थानीय लोग भी उनके साथ मिलकर नगर कीर्तन व लंगर में सहयोग करते हैं।

विजयनगरम में अभी भी एक भी सिख परिवार नहीं है, पर तत्कालीन कलेक्टर व ऑटो पार्ट्स व्यवसायी अमरजीत सिंह ने गुरुद्वारा का निर्माण कराया था। बाद कलेक्टर के सेवानिवृत्त होने के बाद कुछ समय में अमरजीत सिंह का भी निधन हो गया। इसके बाद दिल्ली निवासी अमरजीत सिंह के अनुज देवेंद्र सिंह आनंद व विशाखापट्टनम के होटल व्यवसायी बलजिंदर सिंह, विशाखापट्टनम गुरुद्वारा साद संगत के प्रधान आनंद शाह सहित रायपुर सिख समाज के रिंकू ओबेरॉय, हरिकिशन सिंह राजपूत, सुखदेव सिंह (टाटीबंध), जोगेंद्र सिंह सहित हम चाकर गोविंद की गतका टीम प्रमुख हरविंदर सिंह हरु का सहयोग लगातार मिलने से सभी पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं।

गुरुद्वारा में मत्था टेककर शुरू करते हैं काम

विजयनगरम में गुरुद्वारा संचालन करने वाले शिवलकर कौम के प्रमुख प्रताप सिंह जूनी बताते हैं कि उनके यहां कुल 18 परिवार रहते हैं। उनके पुरखे श्री गुरु गोविंद सिंह जी को हिन्दू धर्म रक्षा के लिए हथियार बनाकर देते थे, तब से आज तक वे यही कर रहे हैं। वर्तमान में विजयनगरम में वे पूरे परिवार के साथ लोहे का धमेला, तवा, कड़ाही सहित अन्य सामग्री बनाकर थोक में ही बेच देते हैं। चूंकि उन्हें विरासत में ही गुरु गोविंद सिंह जी की सेवा मिली है, लिहाजा वे प्रतिदिन पहले गुरुद्वारा में मत्था टेककर ही अपना काम शुरू करते हैं।

 

नानक दरबार के नाम से जाना जाता है गुरुद्वारा

प्रताप सिंह के अनुसार 2001 में विजयनगरम में कलेक्टर हरप्रीत सिंह थे। इस समय गुरु के भक्तों ने उनसे गुरुद्वारा के लिए जमीन की मांग रखी थी, जिसे स्वीकार करते हुए विजयनगरम शहर के मुहाने पर एक जगह दी गई थी, जिसमें विजयनगरम में ऑटो पार्ट्स के व्यवसायी अमरजीत सिंह ने स्वयं के खर्च से गुरुद्वारा बना दिया। अब गुरुद्वारा नानक दरबार के नाम से जाना जाता है।

हर रविवार लगता है लंगर

विजयनगरम निवासी सिंधी समुदाय के युवक कुशाल कुकरेजा ने बताया कि यहां करीब 30 परिवार सिंधी समुदाय के हैं। सभी सदस्य प्रतिदिन गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के बाद ही अपने काम में निकलते हैं। प्रत्येक रविवार गुरुद्वारा साहिब में लंगर भी आयोजित किया जाता है, जिसमें करीब सैंकड़ाभर लोग प्रसाद प्राप्त करते हैं। यहां प्रतिवर्ष सभी सिख पर्व मनाते हैं, जिसमें बकायदा प्रभात फेरी भी निकाली जाती है। अभी गुरु साहिब के प्रकाश व सुखासन के लिए पटना से पहुंचे एक ग्रंथी भी हैं, जो नियमानुसार शबद-कीर्तन के साथ सेवा करते हैं।


अन्य पोस्ट