महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 8 फरवरी। धान खरीदी के अंतिम तिथि तक महासमुंद जिले के लगभग 9600 किसानों ने अपना धान नहीं बेच पाया। सरकार द्वारा खानापूर्ति के लिए महज 2 दिन की अवधि बढ़ाकर वाहवाही लूटा गया।
केवल महासमुंद जिले में यह स्थिति समाने आई है तो पूरे प्रदेश में धान नहीं बेच पाने वाले किसानों के चौंकाने वाले आंकड़े आ सकते हैं। सरकार के ईशारे पर प्रशासन ने जान बूझकर कम धान खरीदी की। किसानों के बिना जानकारी उनका रकबा समर्पण कराया गया। एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन तथा टोकन के नाम पर किसानों को परेशान किया गया। कई किसान सरकार की बदनियती के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने तक मजबूर हो गए। 2 दिन पूर्व ही पिथौरा वनांचल क्षेत्र कौहाबाहरा की एक महिला किसान ने धान नहीं बिक पाने के कारण जहर सेवन कर लिया। सरकार ने सोची समझी रणनीति के तहत किसानों को धान बेचने से वंचित किया है। उक्त वक्तव्य पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने विज्ञप्ति में कही।
उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि किसानों की समस्याओं को नजर अंदाज कर सरकार केवल वाहवाही लूटने के लिए धान खरीदी की अवधि दो दिन बढ़ाकर औपचारिकता निभाई। महासमुंद जिले में हजारों किसानों का लगभग 30 हजार एमटी धान अब भी नहीं बिक पाया है। ऐसे में सरकार द्वारा मात्र दो दिन की खरीदी अवधि बढ़ाना किसानों के साथ मजाक था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम करना चाहती तो कम से कम 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए थाए ताकि सभी किसानों का धान खरीदा जा सके। श्री चंद्राकर ने बताया कि इस बार महासमुंद जिले में पिछले वर्ष की तुलना में धान खरीदी में भारी गिरावट आई है।
उनके अनुसार जिले में इस बार पिछले सीजन की तुलना में 1 लाख एमटी से भी कम धान खरीदा गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि खरीदी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और हजारों किसान परेशान हैं। उन्होंने बताया कि 5 और 6 फरवरी को केवल 2500 किसानों से लगभग 19 हजार एमटी धान ही खरीदा जा सकता। जबकिए लक्ष्य के अनुरूप 1 लाख 45 हजार एमटी धान और खरीदा जाना था। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है।
धान खरीदी की व्यवस्था समय पर सुचारू रूप से नहीं की गईए टोकन व्यवस्था में अव्यवस्था रही और कई केंद्रों में बार.बार तकनीकी व प्रशासनिक दिक्कतें सामने आईं। इसके कारण किसानों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी और अंतत: उनका धान खरीदा ही नहीं जा सका।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल घोषणा और प्रचार में व्यस्त है। जबकि जमीनी स्तर पर किसान परेशान हैं। दो दिन की अतिरिक्त खरीदी अवधि बढ़ाकर सरकार केवल अपनी छवि सुधारने का प्रयास किया। वास्तविकता यह है कि किसानों का धान अभी भी कोठार और घरों में पड़ा है, और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर किसानों को ठगने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस वर्ष धान खरीदी पूरी तरह सुनियोजित षड्यंत्र के तहत की गई है। जब किसान धान की फसल लगा रहे थेए उसी समय सोसाइटियों में खाद की किल्लत पैदा कर दी गई और कम मात्रा में खाद उपलब्ध कराया गया। ताकि किसान कम उत्पादन करें। इसके बावजूद किसानों ने अपने दम पर अच्छी फसल तैयार की तो शासन द्वारा रकबे की जांच सहित विभिन्न प्रकार के दबाव बनाए जाने लगे। धान खरीदी शुरु होने के बाद भी अनेक नियम.कायदों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर किसानों को बेवजह परेशान किया गया। यहां तक कि घर-घर जाकर रकबा समर्पण के नाम पर किसानों को डराने-धमकाने की बात भी सामने आई। उन्होंने कहा कि खरीदी कम हो, इसके लिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था में भी जानबूझकर तकनीकी दिक्कतें पैदा की गई। जिसके चलते पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार धान खरीदी काफी कम हुई है और किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं।


