महासमुन्द

लिमगांव मिडिल स्कूल प्रकरण: 2023 की जांच में गवाहों के बयान बदलने का दावा, दबाव के आरोप
02-Jan-2026 4:19 PM
 लिमगांव मिडिल स्कूल प्रकरण: 2023 की जांच में गवाहों के बयान बदलने का दावा, दबाव के आरोप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 2 जनवरी। महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव से जुड़ा वर्ष 2023 का एक प्रकरण जांच के दौरान नए मोड़ पर पहुंच गया है। स्कूल में प्रधानपाठक की अनुपस्थिति, बाहरी व्यक्ति से अध्यापन कराए जाने और दस्तावेजों में हस्ताक्षरों को लेकर की जा रही जांच के दौरान कुछ शिक्षकों ने अपने पूर्व बयानों से भिन्न बयान दिए हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि उनसे पूर्व में दबाव में बयान और पंचनामा तैयार कराया गया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 11 अगस्त 2023 को तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सरायपाली हेमंत रमेश नंदनवार (आईएएस) द्वारा स्कूल का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के समय प्रधानपाठक धनीराम चौधरी विद्यालय में उपस्थित नहीं पाए गए थे, जबकि छिन्दपाली निवासी जितेन्द्र साहू अध्यापन करते मिले थे।

 जांच में यह बात सामने आई थी कि प्रधानपाठक लकवाग्रस्त हैं और लंबे समय से विद्यालय नहीं आ रहे थे। निरीक्षण के दौरान तैयार पंचनामा में यह भी दर्ज किया गया कि बाहरी व्यक्ति से अध्यापन कराया जा रहा है।

उस समय संकुल प्रभारी ठण्डाराम टिकूलिया, संकुल समन्वयक गिरधारी लाल पटेल, शिक्षक दिनेश पटेल, जितेन्द्र साहू, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी डी.एन. दीवान एवं अन्य की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया गया था, जिस पर संबंधितों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।

वर्तमान जांच में यह तथ्य सामने आया है कि सितम्बर 2022 से 11 अगस्त 2023 की अवधि में जितेन्द्र साहू द्वारा पढ़ाए जाने की बात कही जा रही है, जबकि उपस्थिति पंजी में इसी अवधि में प्रधानपाठक धनीराम चौधरी के हस्ताक्षर दर्ज पाए गए हैं। यह बिंदु जांच का विषय बना हुआ है।

इस प्रकरण की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास द्वारा 18 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री सचिवालय, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिवों तथा जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को दी गई थी। इसके बाद 11 दिसंबर को प्रभारी बीईओ बद्रीविशाल जोल्हे के नेतृत्व में जांच दल द्वारा स्कूल पहुंचकर जांच की गई।

जांच के दौरान शिक्षक ठण्डाराम टिकूलिया, गिरधारी लाल पटेल एवं दिनेश पटेल ने अपने पूर्व में दिए गए बयानों से असहमति जताते हुए कहा कि उनसे तत्कालीन एसडीएम द्वारा दबाव में बयान और पंचनामा तैयार कराया गया था। इससे पहले 26 जून को की गई एक अन्य जांच के दौरान भी इन शिक्षकों ने तत्कालीन अधिकारी पर दबाव और दुव्र्यवहार के आरोप लगाए थे। ये आरोप संबंधित शिक्षकों द्वारा लगाए गए हैं, जिनकी सत्यता जांच के अधीन है।

जांच में यह भी पाया गया कि कुछ शैक्षणिक अभिलेखों में प्रधानपाठक के स्थान पर अन्य शिक्षकों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। शिक्षकों का कहना है कि प्रधानपाठक के स्वास्थ्य कारणों से ऐसा किया गया, हालांकि इस संबंध में किसी लिखित आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। यह पहलू भी जांच के दायरे में है।

 

दस्तावेजों के अनुसार 2 अगस्त 2022 को संकुल प्रभारी एवं संकुल समन्वयक द्वारा प्रधानपाठक के स्वास्थ्य और बाहरी शिक्षक रखे जाने की सूचना बीईओ कार्यालय सरायपाली को दी गई थी। इस पर आगे क्या कार्रवाई हुई, यह भी जांच का विषय है।

प्रभारी बीईओ बद्रीविशाल जोल्हे ने बताया कि मामले में जांच जारी है और जांच पूर्ण होने के बाद ही जानकारी साझा की जाएगी। वहीं सरायपाली बीईओ डी.एन. दीवान ने कहा कि वे वर्तमान में अवकाश पर हैं। इस संबंध में तत्कालीन एसडीएम से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

फिलहाल मामला जांचाधीन है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।


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