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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 12 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने व्यापम के खिलाफ दायर उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें अभ्यर्थियों ने अपनी श्रेणी ओबीसी 'क्रीमी लेयर' से बदलकर ओबीसी 'नॉन-क्रीमी लेयर' करने की मांग की थी। अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि ऑनलाइन आवेदन में सुधार का निर्धारित अवसर उपलब्ध था, जिसे याचिकाकर्ताओं ने समय रहते उपयोग नहीं किया।
याचिकाकर्ता सुप्रिया पुश्ती, देवेंद्र, सुषमा सहित अन्य अभ्यर्थियों ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर की थी। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) के परिणाम में दर्ज उनकी श्रेणी को ओबीसी (क्रीमी लेयर) से बदलकर ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) किया जाए।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि वर्ष 2026 की टेट परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अभ्यर्थियों से त्रुटिवश 'ओबीसी क्रीमी लेयर' विकल्प चयनित हो गया था, जबकि वे वास्तव में 'नॉन-क्रीमी लेयर' श्रेणी से संबंधित हैं।
न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि ऑनलाइन फॉर्म में सुधार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि के अगले दिन से तीन दिन का अवसर दिया गया था। यह सुधार विंडो 9 दिसंबर से 11 दिसंबर 2025 तक खुली रही।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सुधार के लिए 20 मार्च 2026 को प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया, जो निर्धारित समय सीमा से काफी बाद का था। परिणाम घोषित होने के बाद जारी निर्देशों के अनुसार सुधार का अवसर समाप्त हो चुका था। इसलिए याचिका को प्रारंभिक स्तर (मोशन स्टेज) पर ही खारिज किया जाता है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी आग्रह किया गया कि चूंकि श्रेणी संशोधन के लिए प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया जा चुका है, इसलिए प्रतिवादियों को उस पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए। हालांकि कोर्ट ने माना कि आवेदन भरने और सुधार से संबंधित स्पष्ट निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे और अभ्यर्थी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं कर सके।
कोर्ट के इस आदेश के साथ ओबीसी श्रेणी संशोधन से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज हो गईं।


