कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 28 नवंबर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन इस वर्ष शुरुआत से ही अव्यवस्था और तकनीकी गड़बडिय़ों के कारण किसान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जिले के कई धान खरीदी केंद्रों में किसानों ने आज विरोध जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार भले ही सुचारु खरीदी का दावा कर रही हो, परंतु जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
कोण्डागांव के कुम्हारपारा धान खरीदी केंद्र में पहुंचे बुनागांव और वनसिरसी गांव के किसानों ने बताया कि उनके गांव के किसी भी किसान का अब तक एक दाना धान नहीं खरीदा गया है। वहीं जब वे टोकन तुम्हार द्वार एप में ऑनलाइन टोकन कटवाने की कोशिश करते हैं, तो पोर्टल में टोकन लिमिट शून्य दिखाई देती है। ऑफलाइन टोकन कटवाने के लिए केंद्र पहुँचने पर भी उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि स्लॉट पहले ही फुल हो चुके हैं। किसानों का कहना है कि खरीदी शुरू होने के दिन से ही यह समस्या बनी हुई है, जिसके कारण वे बार-बार केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।
इसी तरह की स्थिति सोनाबाल धान खरीदी केंद्र में देखने को मिली। शुक्रवार को ग्राम मोहलई और नगरी के किसान धान बेचने पहुंचे थे, लेकिन ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों रिकॉर्ड में उनके लिए टोकन स्लॉट पूर्ण दिखाया गया, जबकि इन किसानों ने अब तक एक भी बार धान बिक्री नहीं की है। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन 70 प्रतिशत और ऑफलाइन 30 प्रतिशत टोकन की निर्धारित प्रणाली व्यवहार में पारदर्शी रूप से लागू नहीं हो रही है, जिसके कारण वास्तविक किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं।
उधर, जिला खाद्य अधिकारी नवीन श्रीवास्तव ने किसानों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि समिति स्तर पर किसी ग्राम पंचायत के लिए विशेष दिवस निर्धारित करने जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है। उनके अनुसार, समिति में पंजीकृत कोई भी किसान कभी भी ऑनलाइन टोकन कटवा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार को 746 टोकन जारी किए गए, जिनमें 70 प्रतिशत टोकन तुम्हार द्वार एप से और 30 प्रतिशत ऑफलाइन काटे गए। उनका कहना है कि जिले में अब तक कुल 1 लाख 80 हजार क्विंटल धान खरीदी सुचारु एवं सुव्यवस्थित तरीके से की जा चुकी है।


