कोण्डागांव

आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का पुनर्गठन व बैठक
21-Aug-2025 10:21 PM
आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का पुनर्गठन व बैठक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोण्डागांव, 21 अगस्त। शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोंडागांव में आज आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) का पुनर्गठन करते हुए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम ने की।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ-साथ बाह्य सदस्यों एवं छात्र प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय रूप से भागीदारी की।

प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम डॉ. आत्राम ने कहा कि आईक्यूएसी का उद्देश्य महाविद्यालय की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना है। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप हमें विद्यार्थियों के समग्र विकास, अनुसंधान को प्रोत्साहन और स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने महाविद्यालय में स्मार्ट क्लास, अनुसंधान प्रयोगशाला एवं पुस्तकालय के डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. किरण नुरुटी ने कहा कि एनईपी 2020 की प्रभावी क्रियान्विति ही हमारे भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने छात्राओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, करियर काउंसलिंग और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण की बात कही।

वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. पुरोहित सोरी  ने कहा कि महाविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता तभी बढ़ेगी जब अनुसंधान गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने शोध पत्र प्रकाशन और विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में भागीदारी को बढ़ावा देने पर बल दिया।

आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. देवाशीष हालदार ने विस्तृत रूप से आईक्यूएसी की योजना और क्रियान्वयन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आईक्यूएसी केवल औपचारिक समिति नहीं बल्कि संस्थान की आत्मा है, जिसके द्वारा हर विभाग में गुणवत्ता का सतत प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा।

बाह्य सदस्यगण देवेंद्र सोरी, सहायक संचालक योजना ने कहा कि महाविद्यालय को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बनानी चाहिए। उद्योगों से सहयोग लेकर प्लेसमेंट सेल को सशक्त करने की जरूरत है।

नरेंद्र कुमार नायक, प्राचार्य ने कहा कि शिक्षक ही महाविद्यालय की रीढ़ हैं, अत: शिक्षक प्रशिक्षण, ढ्ढष्टञ्ज आधारित शिक्षण एवं नियमित अकादमिक समीक्षा आवश्यक है।

आजाद सिंह पात्रे, श्रम अधिकारी ने छात्रों में श्रम एवं कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल दिया।

राजेश दीवान, पूर्वछात्र एवं व्यवसायी ने कहा कि पूर्वछात्रों की भूमिका बेहद अहम है। पूर्वछात्र मिलन और अलुमनाई फंड से विकास कार्यों को गति दी जा सकती है।

हर्ष लाहोटी, स्थानीय समाज सदस्य ने कॉलेज को स्थानीय समाज से जोडऩे की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि महाविद्यालय की गतिविधियाँ समाज तक पहुँचे और समाज का सहयोग कॉलेज तक आए।

श्वेता सिंह एवं नवीन देवांगन, छात्र प्रतिनिधि  दोनों ने छात्र-हित की समस्याएँ रखीं जैसे कि पेयजल, खेल सामग्री, इंटरनेट सुविधा और छात्रवृत्ति संबंधी पारदर्शिता।

प्राध्यापक सदस्य शोभाराम यादव ने महाविद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों की निरंतरता पर बल दिया।

शशिभूषण कन्नौजे ने कहा कि एनएसएस एवं पर्यावरणीय गतिविधियों से छात्रों का सामाजिक विकास सुनिश्चित होगा।

रूपा सोरी ने महिला सशक्तिकरण और छात्राओं की सुरक्षा पर विचार रखे।

नसीर अहमद ने ई-लर्निंग, डिजिटल क्लासरूम और रिसर्च डेटा मैनेजमेंट पर जोर दिया।

विनय कुमार देवांगन ने छात्रों के लिए करियर मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कक्षाएं प्रारंभ करने का सुझाव दिया।

नेहा बंजारे ने स्वास्थ्य, मानसिक परामर्श एवं महिला स्वास्थ्य शिविर की मांग रखी।

 अर्जुन सिंह नेताम ने कहा कि विज्ञान संकाय को उन्नत प्रयोगशालाओं एवं रिसर्च प्रोजेक्ट्स की सख्त आवश्यकता है।

समलेश पोटाई ने जनजातीय अंचल के विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षिक योजनाओं की वकालत की।

लोचन सिंह वर्मा ने कहा कि कॉलेज को प्लेसमेंट ड्राइव और उद्योगों से एमओयू की दिशा में काम करना चाहिए।

 क्रीड़ाधिकारी हुमन राम यदु ने खेलकूद एवं शारीरिक शिक्षा के लिए संसाधनों को बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक का समापन डॉ. आकाश वासनीकर ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया। उन्होंने कहा कि सभी सुझावों को महाविद्यालय की कार्ययोजना में सम्मिलित किया जाएगा। यह पुनर्गठित आईक्यूएसी आने वाले समय में शैक्षणिक, सामाजिक और अधोसंरचनात्मक विकास का सेतु बनेगा।


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