कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 6 अगस्त कोण्डागांव जिले में पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं और जनजातीय परंपराओं को संरक्षित और सशक्त बनाने की मांग को लेकर मांझी चालकी गंगाराम नाग के नेतृत्व में परंपरागत गणों का प्रतिनिधिमंडल 5 अगस्त को कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसे डिप्टी कलेक्टर किशोर कुमार वर्मा ने प्राप्त किया।
- ज्ञापन में अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्तर संभाग के परगना क्षेत्र में कार्यरत पारंपरिक प्रमुख गण जैसे मांझी, चालकी, मेम्बर, मेम्बरीन, गायता, पुजारी, देवनाईक, पटेल, सिरहा, गुनिया, वैद्यराज, बाजा मोहरिया और देव आठपहरियां की भूमिका और मान्यता को विधिवत रूप से मान्यता देने की मांग की गई है। उन्होंने यह मांग रखी कि इन प्रमुख पारंपरिक पदों की जिला संगठन समिति का पंजीयन क्रमांक प्रदान किया जाए ताकि उनकी भूमिका को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी पहचान मिल सके।
सौंपे गए ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि इन परंपरागत गणों को ताम्र पत्र में नामांकित परिचय पत्र जारी किए जाएं, जिससे उनकी सामाजिक पहचान को विधिक रूप से सशक्त किया जा सके।
साथ ही, इन प्रमुख पदों को प्रतीकात्मक सम्मान स्वरूप पदानुसार रंगीन पगडिय़ाँ प्रदान करने तथा प्रति माह 2500 रुपये का मासिक मानदेय देने की मांग की गई है, जिससे इनकी सेवाओं का उचित आर्थिक सम्मान हो सके। इसके अतिरिक्त, बस्तर क्षेत्र की पारंपरिक वन औषधियों, पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रत्येक जिले में वन औषधि प्लांटेशन हेतु जमीन और योजना की स्वीकृति की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आग्रह किया कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के अवसर पर देवी-देवताओं के साथ जगदलपुर पहुंचने वाले मांझी, चालकी, मेम्बर, मेम्बरीन और देव समितियों के ठहरने के लिए भवन निर्माण हेतु भूमि और राशि स्वीकृत की जाए।


