कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 4 अगस्त। जिला मुख्यालय कोंडागांव में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर के विभिन्न चौक-चौराहों, कॉलोनियों, सार्वजनिक स्थलों और राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर कुत्तों का झुंड खुलेआम घूमता नजर आ रहा है। बढ़ती कुत्तों की संख्या के चलते आमजन, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, भय और असुरक्षा की भावना के साथ घर से निकल रहे हैं।
सुबह-शाम स्कूल जाने वाले बच्चों और काम पर निकलने वाले लोगों के लिए सडक़ पर चलना चुनौती बन गया है। कई स्थानों पर आवारा कुत्तों द्वारा राहगीरों को दौड़ाने और हमला करने की घटनाएं सामने आई हैं।
जुलाई में 40 से अधिक डॉग बाइट केस
जिला अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार केवल जुलाई माह में ही 40 से अधिक लोग कुत्तों के काटने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि समस्या अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और सुरक्षा का गंभीर संकट बन चुकी है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
शहरवासियों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन की निष्क्रियता ने इस समस्या को और भी विकराल रूप दे दिया है। नगर निगम द्वारा न तो कुत्तों की नसबंदी का अभियान चलाया गया है और न ही किसी अन्य स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास किए गए हैं। परिणामस्वरूप, कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और आए दिन की घटनाएं लोगों में रोष और भय दोनों फैला रही हैं।
नागरिकों ने जताई नाराजगी, कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय निवासी प्रेमलाल साहू ने बताया, बच्चों को स्कूल भेजते वक्त रोज डर बना रहता है। कई बार मोहल्ले में ही कुत्ते हमला कर चुके हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
दूसरी ओर गायत्री मिश्रा, एक अभिभावक ने कहा, हम अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डरते हैं। प्रशासन को कब जागेगा?
जनता की प्रमुख मांगें-आवारा कुत्तों को पकडऩे और पुनर्वास की त्वरित कार्रवाई, शहर भर में नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाया जाए। स्कूल, हॉस्पिटल, कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों को डॉग-फ्री जोन घोषित किया जाए। रात में पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाई जाए।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में नगर पालिका द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे सडक़ पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


