कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 19 जून। बस्तर संभाग के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। लंबे संघर्ष और अथक प्रयासों के बाद आखिरकार कोंडागांव और सुकमा जिलों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) की स्वीकृति मिल गई है। यह सौगात कोंडागांव की विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी के सतत प्रयासों और दूरदृष्टि का परिणाम है।
विधायक लता उसेंडी ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि,यह केवल एक संस्थान की स्थापना नहीं, बल्कि आदिवासी बहुल इस अंचल में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। आने वाली पीढिय़ों को इससे प्रशिक्षित और दक्ष शिक्षक मिल सकेंगे।
पांच वर्षों का इंतजार, अब पूरी हुई मांग
कोंडागांव में पहले से ही एक ब्लॉक शिक्षक शिक्षा संस्थान (बाइट) का भवन मौजूद था, लेकिन उसे डाइट का दर्जा नहीं मिल पा रहा था। लता उसेंडी ने विधानसभा, प्रशासन और सरकार के समक्ष लगातार इस मांग को मजबूती से रखा, विशेषकर यह ध्यान दिलाया कि आदिवासी अंचल में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना बेहद आवश्यक है। अब छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे डाइट के रूप में उन्नयन की मंजूरी दे दी है।
क्षेत्रीय शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
डाइट की स्थापना से क्षेत्र के शिक्षकों को अब बस्तर या अन्य जिलों में जाकर प्रशिक्षण नहीं लेना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक शिक्षण विधियों, पेडागॉजी और नवाचार आधारित प्रशिक्षण सुलभ होगा। यह नई शिक्षा नीति 2020 की दृष्टि से भी एक बड़ा कदम है, जिसमें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षक तैयार करने की बात कही गई है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
इस मौके पर विधायक लता उसेंडी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि, कांग्रेस सिर्फ झूठ और फरेब की राजनीति करती रही है। उन्होंने केवल युक्तिकरण के नाम पर जनता को धोखा दिया है, जबकि भाजपा सरकार ने धरातल पर काम कर दिखाया है।
बस्तर को मिलेगा शैक्षणिक नवाचार का केंद्र
कोंडागांव और सुकमा में डाइट की स्थापना से अब पूरे बस्तर अंचल को एक नए प्रशिक्षण, नवाचार और शैक्षणिक उन्नयन के केंद्र का लाभ मिलेगा। यह निर्णय राज्य सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और आदिवासी क्षेत्रों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाता है।


