कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 9 मई। वर्ष 2009 में जिला राजनांदगांव के मदनवाड़ा कोरकोट्टी के पास हुए नक्सली हमले में शामिल एक सक्रिय नक्सली सहित दो नक्सलियों ने गुरुवार को आत्मसमर्पण कर दिया। इस घटना में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक समेत कुल 29 जवान शहीद हुए थे। आत्मसमर्पण करने वाले दोनों माओवादी लंबे समय से विभिन्न जिलों में नक्सली घटनाओं में सक्रिय थे।
इनमें से एक ने वर्ष 2011 में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश पवार पर हमले की घटना में भी भाग लिया था, जिसमें 9 जवान शहीद हुए थे। वहीं वर्ष 2007 में कोण्डागांव के विश्रामपुरी थाने पर हमले और आगजनी की घटना में भी इन नक्सलियों की संलिप्तता पाई गई थी, जिसमें तीन जवान शहीद हुए थे और एक गंभीर रूप से घायल हुआ था।
आत्मसमर्पित नक्सलियों में पहला नाम रैसिंग कुमेटी उर्फ रतनसिंह कुमेटी (35 वर्ष), निवासी ग्राम देवगांव थाना आमाबेड़ा जिला कांकेर का है। दूसरा नाम पुनाय आचला उर्फ हिरोंदा (34), निवासी ग्राम आलप्रस थाना कोयलीबेड़ा जिला कांकेर का है। दोनों पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।
दोनों ने पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्हें तत्काल शासन की पुनर्वास नीति के अंतर्गत 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इनके विरुद्ध कांकेर जिले के विभिन्न थानों में कई गंभीर प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें हत्या, शस्त्र अधिनियम, आगजनी और साजिश की धाराएं शामिल हैं।
दोनों नक्सली वर्ष 2002 और 2005 से लेकर 2023 तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहे हैं। वे कोण्डागांव, कांकेर, राजनांदगांव, गरियाबंद, धमतरी और नारायणपुर के कई इलाकों में गंभीर वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नक्सली आत्मसमर्पण कर शासन की पुनर्वास नीति से जुड़ रहे हैं। लगातार हो रही सुरक्षा बलों की कार्यवाहियों और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के चलते अब माओवादी संगठन के भीतर डर और असंतोष का माहौल है।
आत्मसमर्पण की इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) कोण्डागांव, उप पुलिस अधीक्षक ऑप्स, डीआरजी व बस्तर फाइटर्स की उपस्थिति रही। दोनों नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।


