कोण्डागांव
आम उत्सव ‘मरका पंडुम’
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 7 अप्रैल। जिला के विकासखंड बड़ेराजपुर के ग्राम पंचायत तितरवंड में 6 अप्रैल को पारंपरिक मरका पंडुम उत्सव का आयोजन धूमधाम से किया गया। यह उत्सव गांव के जंगलों के बीच स्थित मां भंडारीन गुड़ी प्रांगण में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और परंपरागत वेशभूषा में नृत्य-गान करते हुए उत्सव की खुशी मनाई।
यह उत्सव हर वर्ष पारंपरिक देव मेले के दूसरे दिन आयोजित किया जाता है। इस आयोजन में तितरवंड सहित आसपास के गांवों के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। मरका पंडुम, जिसे स्थानीय गोंडी भाषा में आम का त्यौहार कहा जाता है, आदिवासी संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। मरका का अर्थ होता है आम और पंडुम का अर्थ त्यौहार। ग्रामीणों का मानना है कि यह उत्सव केवल खुशी का अवसर नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संतुलन बनाए रखने की एक परंपरा भी है। इस दिन नए आम की पहली फसल देवी-देवताओं को चढ़ाकर उनसे अनुमति ली जाती है कि अब आम खाया जा सकता है। यह त्योहार आदिवासी जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
इस अवसर पर गांव के गायता, पुजारी, पटेल सहित युवा और बुजुर्गों ने पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की। देवी-देवताओं की पूजा के बाद नृत्य और गीतों के माध्यम से उत्सव को जीवंत किया गया। मरका पंडुम सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें प्रकृति को देवता मानकर उसका उत्सव मनाया जाता है।


