कोण्डागांव

सेना से सेवानिवृत्त हवलदार रतिराम सोरी का भव्य स्वागत
02-Apr-2025 10:24 PM
सेना से सेवानिवृत्त हवलदार रतिराम सोरी का भव्य स्वागत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोण्डागांव, 2 अप्रैल। भारतीय थल सेना के आर्टिलरी रेजिमेंट में 24 वर्षों तक देश सेवा करने के बाद हवलदार रतिराम सोरी अपने गृहग्राम खंडाम लौटे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद कोण्डागांव के पदाधिकारियों, परिवारजन, मित्रों और ग्रामवासियों ने पूरे जोश और सम्मान के साथ उनका अभिनंदन किया। 

बनियागांव पहुंचने पर ग्रामीणों और परिजनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया। संगठन के सदस्यों, गणमान्य नागरिकों और सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवक-युवतियों ने तिलक, आरती और पुष्पमाला अर्पित कर उनका अभिनंदन किया। आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों के बीच दुर्गा माता मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें भारत माता की जय, वंदे मातरम और जय जवान जय किसान के नारों से पूरा गाँव गूंज उठा। बस्तर की पारंपरिक मांदरी नृत्य और ढोल-नगाड़ों की धुन पर माहौल पूरी तरह देशभक्ति से सराबोर हो गया। 

हवलदार रतिराम सोरी का सेना में चयन 26 मार्च 2001 को हुआ था। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग हैदराबाद में पूरी की और पहली पोस्टिंग पंजाब में मिली। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, बिहार, सियाचिन ग्लेशियर, तेलंगाना और बारामूला में अपनी सेवाएँ दीं। 31 मार्च 2025 को वे नासिक, महाराष्ट्र से सेवानिवृत्त हुए। सेवा के दौरान उन्होंने सिकंदराबाद में डायरेक्टर जनरल आर्टि (2021) और बारामूला में मेजर जनरल (2024) से उत्कृष्ट सेवा पदक और प्रशंसा पत्र प्राप्त किए। अपनी सेवानिवृत्ति पर उन्होंने कहा, 24 वर्षों तक देश की सेवा करने का जो सम्मान और गौरव मिला, वह अतुलनीय है। मैं युवाओं से आह्वान करता हूँ कि वे सेना में भर्ती होकर राष्ट्र सेवा में योगदान दें।  हवलदार रतिराम सोरी ने अपने सम्मान में आए सभी ग्रामवासियों और पूर्व सैनिक सेवा परिषद कोण्डागांव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने घोषणा की कि वे अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद कोण्डागांव से जुडक़र समाज सेवा में योगदान देंगे।

 इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बंगाराम सोड़ी, पूर्व सैनिक सेवा परिषद कोण्डागांव के संरक्षक सुब्रत साहा, जिलाध्यक्ष सूरज यादव, सचिव उमेश साहू, कोषाध्यक्ष सोमेश्वर भारती, सेवारत सैनिक किशनलाल खंडाम, सरपंच जगबंधु शोरी और आसपास के गाँवों के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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