कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 20 फरवरी। जिला मुख्यालय कोण्डागांव में संचालित चावरा हायर सेकेंडरी स्कूल पर भेदभाव का गंभीर आरोप लगा है। यह आरोप कक्षा 2 में पढऩे वाले एक छात्र के परिजनों ने लगाया है। परिजनों का कहना है कि वे एक विशेष जाति से हैं, जिसके कारण उनके बच्चे के साथ विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों द्वारा भेदभाव किया जा रहा है।
परिजनों का आरोप है कि बच्चे को कक्षा में अन्य छात्रों से अलग बैठाया जाता है और उसे छोटे टेबल-बैंच पर बैठने के लिए मजबूर किया गया है। यह स्थिति पिछले एक महीने से लगातार चल रही है, जिससे छात्र मानसिक रूप से आहत और तनावग्रस्त हो गया है।
इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान ने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। परिजनों ने विद्यालय प्राचार्य, कक्षा शिक्षिका और विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इधर चावरा स्कूल की ओर से कोई भी मीडिया बयान देने के लिए तैयार नहीं है।
क्या कहता है शिक्षा का अधिकार अधिनियम
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार, 6-14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। इस अधिनियम की धारा 17 स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी विद्यालय में जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(ह्म्) और 3(1)(ह्य) के तहत, यदि किसी अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति को सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों या किसी भी संस्थान में अपमानित किया जाता है या भेदभाव किया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अब इस मामले में जिला शिक्षा विभाग जांच करेगा और यदि भेदभाव की पुष्टि होती है, तो स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज होती है, तो विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है।
विद्यालयों में जातिगत भेदभाव शिक्षा व्यवस्था के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन है। यदि इस मामले में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।


