कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 13 फरवरी। नगर पालिका क्षेत्र के 22 वार्डों में रहने वाली लगभग 30,000 से अधिक आबादी के लिए गर्मी के समय में नारंगी नदी ही पेयजल का मुख्य स्रोत होती है। नगर पालिका इसी नदी से पानी पंप कर नगरवासियों को आपूर्ति करती है, जिससे गर्मी में पानी की समस्या को दूर किया जा सके। लेकिन इस साल पानी की किल्लत और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि जोन्दरापदर स्थित नारंगी नदी के एनिकट का गेट अज्ञात तत्वों द्वारा खोल दिया गया है, जिससे नदी के तल में पानी नहीं बचा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह काम अवैध रेत माफियाओं का हो सकता है। दरअसल, नदी में पानी रहने से रेत का उत्खनन संभव नहीं होता, इसलिए अवैध खनन करने वालों ने एनिकट का गेट खोल दिया होगा ताकि पानी निकल जाए और वे आसानी से रेत निकाल सकें।
गुरुवार सुबह सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें बताया गया कि गर्मी आने से पहले ही नदी का पानी बहा दिया गया है, जिससे क्षेत्र में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
नदी का जलस्तर कम होने से कोण्डागांव के बाजारपारा स्थित पानी टंकी में जलभराव नहीं हो पाया। इस कारण बाजारपारा के कई हिस्सों में गुरुवार को पानी की आपूर्ति बाधित रही।
इस संबंध में नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) दिनेश डे ने बताया कि जब पानी की कमी की सूचना मिली तो वे मौके पर पहुंचे। वहां देखा कि एनिकट का गेट खुला हुआ है, जिससे नदी तल में पानी नहीं बचा।
अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की निगरानी करने वाला खनिज विभाग इस पूरे मामले में मौन है। विभाग के अधिकारी कार्यालय से नदारद पाए गए और जब ‘छत्तीसगढ़’ ने दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कार्रवाई की बात कही।
बेखौफ हो रहा अवैध उत्खनन
जब मीडिया टीम ने मौके पर अवैध रेत खनन कर रहे कुछ ट्रैक्टर चालकों से बातचीत की तो उन्होंने साफ कहा कि विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे वे बेधडक़ अवैध खनन कर रहे हैं। जबकि एनीकट के पास ही जिला प्रशासन द्वारा ‘रेत खनन व परिवहन निषेध ’ का सख्त चेतावनी बोर्ड लगाया गया है।
कोण्डागांव की जल आवश्यकता कितनी?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 135 लीटर पानी का उपयोग करता है, जिसमें पीने, खाना बनाने, नहाने और अन्य घरेलू जरूरतें शामिल होती हैं। कोण्डागांव की कुल आबादी लगभग 30,000 है, यानी प्रतिदिन पूरे शहर को लगभग 40.5 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है। अगर जल स्रोत समय रहते सुरक्षित नहीं किए गए, तो गर्मी में पेयजल संकट विकराल रूप ले सकता है।
अगर जल्द ही एनीकट का गेट बंद कर जल संग्रहण के उचित उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में कोण्डागांव में पानी की भारी किल्लत हो सकती है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाकर नदी में जलभराव बहाल करने और अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की जरूरत है, ताकि नगरवासियों को गर्मी में पानी के लिए भटकना न पड़े।


