कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 2 फरवरी। नगरीय निकाय निर्वाचन के दौरान राजनीतिक प्रचार-प्रसार के लिए छापे जाने वाले पंपलेट, पोस्टर, हैंडबिल और अन्य दस्तावेजों पर मुद्रक (प्रिंटर) और प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित करना अनिवार्य होगा। यदि किसी मुद्रित प्रचार सामग्री पर इनका उल्लेख नहीं किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और इंटरनेट मीडिया में प्रकाशित अथवा प्रसारित होने वाले विज्ञापन और समाचारों की निगरानी के लिए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, कोण्डागांव कुणाल दुदावत, सहायक सूचना अधिकारी (जनसंपर्क कार्यालय, कोण्डागांव) देवेंद्र सोरी और वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार शंभू यादव की गहन नजर रहेगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए जिला स्तरीय एवं संभाग स्तरीय मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) का गठन किया है। कोण्डागांव जिले में जिला स्तरीय एमसीएमसी समिति कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा गठित की गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार निर्वाचन संबंधी पर्चों एवं पोस्टरों में मुद्रक और प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से अंकित किया जाना चाहिए। साथ ही मुद्रित सामग्री की चार प्रतियां और प्रकाशक के घोषणा पत्र की एक प्रति मुद्रण के तीन दिवस के भीतर जिला निर्वाचन कार्यालय को निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करनी होगी। इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापनों की होगी सतत मॉनिटरिंग
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रिंट, इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसारित होने वाले निर्वाचन से जुड़े विज्ञापनों और समाचारों की मॉनिटरिंग के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। आयोग के मार्गदर्शी बिंदुओं के अनुरूप आदर्श आचार संहिता और राजनीतिक विज्ञापनों की निगरानी मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) द्वारा की जाएगी।
इसके अलावा, जिला स्तरीय मॉनिटरिंग प्रकोष्ठ द्वारा पेड न्यूज़ की भी मॉनिटरिंग की जाएगी। यदि कोई संदिग्ध पेड न्यूज़ पाया जाता है तो समिति उसे रिटर्निंग ऑफिसर को भेजेगी। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर अभ्यर्थी को नोटिस जारी करेगा, जिसके जवाब में अभ्यर्थी को 48 घंटे के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।
यदि अभ्यर्थी निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करता है, तो संदिग्ध पेड न्यूज़ को पेड न्यूज़ माना जाएगा और उसकी निर्धारित राशि अभ्यर्थी के निर्वाचन व्यय में जोड़ी जाएगी। यदि अभ्यर्थी जिला स्तरीय समिति के निर्णय से असहमत होता है, तो वह 15 दिनों के भीतर संभागीय समिति में अपील कर सकता है।


