कोण्डागांव

स्टेडियम को बनाया धान संग्रहण केंद्र, ट्रकों की आवाजाही से गड्ढे, चूहे बना रहे बिल
27-Dec-2021 6:10 PM
स्टेडियम को बनाया धान संग्रहण केंद्र, ट्रकों की आवाजाही से गड्ढे, चूहे बना रहे बिल

2 साल से नहीं हो रहे खेल, खिलाड़ी मायूस

प्रवीर सिंह बदेशा

फरसगांव, 27 दिसंबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। कोंडागांव जिले के नगर पंचायत फरसगांव में बच्चों और युवाओं के खेल के लिए एक मात्र मिनी स्टेडियम में दो वर्षों से धान संग्रहण केंद्र बनाकर खिलाडिय़ों को खेल से दूर कर दिया है। धान संग्रहण केन्द्र बनाने के कारण ट्रकों के आने-जाने के कारण मैदान में हर जगह गड्ढे हो गए हैं। धान को खाने के लिए चूहों ने मैदान में जगह-जगह बिल बनाकर कर स्टेडियम को बर्बाद कर दिया है।

हर वर्ष 26 जनवरी को स्टेडियम में फरसगांव के समस्त विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा परेड की जाती थी। परेड के उपरान्त सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे, परन्तु दो वर्षों से सब कार्यक्रम बंद है।

इस विषय में नगर पंचायत के अध्यक्ष गणेश दुग्गा ने बताया कि हमने स्टेडियम को खाली करने के लिए कोण्डागांव कलेक्टर को पत्र दिया है और उनसे मिलकर बात की है। वहीं जनपद अध्यक्ष शिशकुमारी चनाप ने भी स्टेडियम को खाली कराने की बात कही।

राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम से चर्चा करने पर उन्होंने जिला प्रशासन से बात कर इसका हल निकालने की बात कही।

कांकेर सांसद मोहन मण्डावी ने कहा कि स्टेडियम को धान संग्रहण केन्द्र बनाना गलत है। मैं जिला प्रशासन से बात करुंगा।

फरसगांव के निवासी छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री रवि घोष ने कहा, मैं जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ के मंत्री से बात करके इसका समाधान करवाता हूं। ज्ञात हो कि इस स्टेडियम का निर्माण रवि घोष ने अपने सरपंच के कार्यकाल में किया था।

 इस वर्ष धान खरीदी के उपरान्त स्टेडियम में धान का संग्रहण शुरु हो गया है।

ज्ञात हो कि दो वर्ष पूर्व फरसगांव क्षेत्र का पूरा धान खरीदी केंद्र से मिलिंग करने वाली राईस मिलों में चला जाता था, जिससे शासन को डबल ट्रांसपोर्टिंग और रखरखाव का खर्च बच जाता था और संग्रहण केंद्र में धान सडऩे और चूहों की बर्बादी से बच जाता था।

जंगल में खेलने मजबूर हंै खिलाड़ी

खिलाड़ी विप्लव घोष, हेमंत भारद्वाज, मनीष दुग्गा छगेन्द नेताम का कहना है कि पिछले दो वर्षों से  स्टेडियम में धान रखने के कारण हमारे खेल बंद है, हम लोग जंगल में पेड़ों के बीच जगह देखकर खेल कर काम चला रहे हैं। नगर के युवा बुजुर्ग महिला पुरुष सुबह शाम स्टेडियम में जाकर सैर करके स्वस्थ लाभ ले रहे थे, वह भी परेशान हैं। सडक़ में टहलने से दुर्घटना की आशंका रहती है और कई बार दुर्घटना हुई भी है। यहां दो शासकीय विद्यालय ह,ै उनके मैदान में खेलना संभव नहीं है क्योंकि विद्यालय के समय खेलने पर बच्चों को परेशानी होती है। सुबह-शाम टहलने वालों को विद्यालय के मैदान दूर होने पर परेशानी हो रहे है।

उद्देश्य का पालन नहीं हो रहा

खेल मैदान व स्टेडियम के अभाव में खिलाड़ी प्रैक्टिस नहीं कर पाते हंै। वे गली मोहल्ले, जंगल में ही खेलते नजर आते हैं। शासन की मंशा थी कि स्टेडियम बनने से खिलाडिय़ों को प्रैक्टिस करने का मौका मिलेगा और खेल प्रतिभाएं सामने आएंगी। लेकिन खेल मैदान का दूसरे काम के लिए किया जा रहा है।

उच्च अधिकारी से बात करेंगे

मामले में जिला खेल अधिकारी कंवल सायं मरकाम  ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि यह शासन स्तर का मामला है। निश्चित ही खेलने में परेशानी हो रही है, उच्च अधिकारी से बात कर मैदान को संरक्षित करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।


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