कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 6 अक्टूबर। कोरोना काल एक ऐसा समय था जब सभी दुकानों में ताले लटक गये थे और विकास के पहियों पर लॉकडाउन की जंजीरे लटक रही थीं। इस समय मनरेगा योजना संकटमोचक के रूप में सामने आई। जिसने दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को नियमित रोजगार देने के साथ उनमें उम्मीद की एक किरण जगायी रखी। परंतु इस समय लोग घरों से निकलना भी जब सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे थे ऐसे में लोगों को रोजगार से जोडऩे का बीड़ा ग्राम पंचायत बड़ेडोंगर की हेमलता यादव ने उठाया।
कोरोना वॉरियर की भांति संकटकाल में वह घर-घर जाकर लोगों को रोजगार दिलाने का कार्य कर रहीं थी। वे लोगों को रोजगार के लिए प्रेरित करने के साथ कार्यस्थल पर सुरक्षा सावधानियों की व्यवस्था के संबंध में जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ कार्य परिस्थितियों की भी जानकारी देती थीं।
जनपद पंचायत फरसगांव ब्लॉक मुख्यालय से 18 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बड़ेडोंगर की महिला मेट की जिम्मेदारी निभा रही हेमलता यादव का जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है। हेमलता यादव मजदूर परिवार से होने के कारण मनरेगा वह कार्य में मजदूरी करने जाया करती थी। जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता था। बारहवीं कक्षा तक पढ़ी हेमलता की पढ़ाई बारहवीं के बाद ही छूट गई थी। मनरेगा कार्यों में जाने के कारण योजना के संबंध में थोड़ी बहुत जानकारी उन्हें पहले से ही थी। पढाई छूटने के बाद 2020 से अपने माता-पिता एवं भाई के साथ मनरेगा मे मजदूरी कार्य में जाती थी। इस दौरान उन्हें ग्राम पंचायत रोजगार सहायक दुलेन्द्र पात्र से महिला मेट के सबंध में जानकारी प्राप्त हुई।
ग्राम पंचायत बड़ेडोंगर के सरपंच विद्यासागर नायक ने बताया कि हेमलता यादव के कार्य से अन्य महिलाओं को मनेाबल प्राप्त हुआ है साथ ही ग्राम पंचायत के विकास में एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इस वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायत में कुल 9870 मानव दिवस सृजित हुआ है। जिसमें कार्यों की सहभागिता में महिलाओं का प्रतिशत 59.13 प्रतिशत महिला एवं पुरूष श्रमिकों का प्रतिशत केवल 40.87 प्रतिशत रहा।


