कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 13 अगस्त। विकासखण्ड कोण्डागांव के एफआरए क्लस्टर ग्राम मयूरडोंगर में एरोमेटिक कोण्डानार परियोजना को शुभारंभ हस्तशिल्प विकास बोर्ड व विधायक चन्दन कश्यप के हाथों से हुआ।
इस मौके पर उन्होने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार के तहत् मयूरडोंगर ग्राम को शामिल किया गया है तकि इस पिछड़े ग्राम पंचायत में कृषि, उद्यानिकी, क्रेडा, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के समस्त योजनाओं को एक साथ क्रियान्वित कर विकास के नये माडल के स्थापना किया जा सके। अपने ढ़ाई वर्ष के शासन काल में सरकार ने पिछड़े ग्रामों के सर्वागिण विकास के ध्येय को सर्वोपरि रखा है और उसकी तमाम योजनाए मुख्यत: ग्रामीणों क्षेत्रों पर फोकस रही है। समय आ गया है कि ग्रामीण जन इन योजनाओं में स्वत: भागीदारी दर्शाए क्योकि प्राय: यहां देखा जाता है कि ग्रामीण सहभागिता के बिना शासकीय योजना का परिणाम अपेक्षित नहीं रहा है।
इसके आगे उन्होने एरोमेटिक कोण्डानार का जिक्र करते हुए कहा कि सुगंधित एवं औषधीय पौधे का रोपण उसी कृषि नवाचार का हिस्सा है जिसे परपंरागत कृषि से व्यवसायिक कृषि की ओर कदम बढ़ाया जा सके। इस कृषि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसल तीन महिने में तैयार होगी और जिला शासन द्वारा जिस संस्था से अनुबंध किया गया है। उन्ही के द्वारा उठाव और विपणन किया जायेगा। इस प्रकार इससे होने वाले आमदनी का सीधा लाभ किसानों को होगा और इस सुनहरे अवसर का लाभ प्रत्येक किसान को उठाना चाहिए। कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने इस मौके पर कहा कि एरोमेटिक कोण्डानार प्रशासन की एक नई पहल है और एफआरए क्लस्टर ग्रामों के अंतर्गत जिले में मयूरडोंगर और गम्हरी में सुगंधित और औषधी पौधे लेमनग्रास, पचौली, पामरोजा, विटेयर, अमाड़ी, तुलसी जैसे पौधे के रोपण के लिए स्थानीय किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। ऐसी भूमि जहां धान की उपज कम हो या नही के बराबर हो वहां ऐसे पौधों की किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बना सकती है।
अगर लेमनग्रास की बात करे तो एक एकड़ की उपज में एक लाख की आमदनी निश्चित है।
इस प्रकार बस्तर संभाग के अन्य जिलों में भी सुगंधित और औषधी पौधों की कृषि के प्रति उत्साह देखा जा रहा है। अत: स्थानीय कृषकों को भी इसमें रूचि लेकर अपनी आर्थिक खुशहाली का मार्ग चुनना चाहिए।
इसके पूर्व उपसंचालक कृषि देवेन्द्र रामटेके ने विभाग द्वारा डीएमएफ मद से जिले में सुगंधित और औषधी पौधों की खेती कार्ययोजना की संक्षिप्त रूप से जानकारी दी। इसके अलावा अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शासन की योजनाओं मेंं शत् प्रतिशत भागीदारी के लिए ग्रामीणों से आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि ग्राम मयूरडोंगर में 15 एकड़ पर लेमनग्रास के पौधे लगाये जायेेंगें साथ ही 182 एकड़ में अमाड़ी पौधों का रोपण किया गया है। लेमनग्रास के सत् का उपयोग मुख्यत: सुगंधित तेल, मच्छर रोधी सामग्री एवं आयुर्वेदिक दवाओं में होता है। जबकि अमाड़ी पौधों के पत्तों से चॉकलेट, चाय, पाउडर, शरबत तथा खाने की सामाग्रियों निर्मित की जाती है। इस मौके पर जनपद पंचायत अध्यक्ष शिवलाल मण्डावी, उपाध्यक्ष मनोज सेठिया, सदस्य जिला पंचायत रेश्मा दीवान, सरपंच मयुर डोंगर सगरबत्ती नेताम, सरपंच बम्हनी श्री जागेश्वर कोर्राम, सहायक संचालक कृषि बीके शर्मा, अनुविभागीय अधिकारी कृषि उग्रेश देवांगन सहित विभागीय कर्मचारी, ग्रामीण जन उपस्थित थे।


