अंतरराष्ट्रीय
-डैनियल डी सिमोन
अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम का एलान कर दिया है, लेकिन अभी तक इसराइल ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
भले डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम का फ़ैसला ले लिया हो, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसमें इसराइल की सहमति है या नहीं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पोस्ट में बताया कि 'लेबनान में भी युद्धविराम' लागू होगा.
जबकि यहां पर इसराइल की सेना मौजूद है, जो कहती रही है कि लेबनान से तब तक नहीं हटेंगे जब तक हिज़्बुल्लाह का ख़तरा ख़त्म नहीं हो जाता.
इसकी संभावना कम है कि इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू युद्धविराम को उसी तरह 'जीत' बताएंगे जैसे अमेरिका और ईरान बता रहे हैं.
28 फ़रवरी को युद्ध का एलान करते हुए उन्होंने कहा था, "इस अभियान का लक्ष्य ईरान के आयतुल्लाह शासन के ख़तरे को ख़त्म करना है और यह अभियान तब तक चलेगा जब तक ज़रूरी होगा."
हालात अभी ऐसे हैं कि ईरानी सेना अब भी ख़तरा पैदा करने में सक्षम है और शासन पूरी तरह मौजूद है.
यरूशलम में अब भी मिसाइल अलर्ट और धमाकों की आवाज़ें सुनाई दी हैं. इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स ने कहा है कि ईरान से कई मिसाइलें दाग़ी गईं.
अगर युद्ध का अंत उस '10-बिंदु प्रस्ताव' पर होता है जिसका ज़िक्र ट्रंप ने किया, तो यह ईरान की रणनीतिक जीत मानी जाएगी.
संभव है कि नेतन्याहू की कैबिनेट के चरमपंथी सदस्य किसी भी युद्धविराम या युद्ध के अंत को मानने से इंकार कर दें. ख़ासकर, अगर इसमें लेबनान भी शामिल हो, जिससे चुनावी साल में उनके लिए राजनीतिक चुनौती पैदा हो सकती है. (bbc.com/hindi)


