धमतरी

सरकारी संरक्षण में चल रहा अवैध रेत का कारोबार-तारणी
01-Jun-2026 3:27 PM
सरकारी संरक्षण में चल रहा अवैध रेत का कारोबार-तारणी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

 कुरुद, 1 जून। धमतरी जिले के ग्राम खरेंगा में रेत खदान से मानव कंकाल मिलने की घटना ने पूरे क्षेत्र में खलबली मचा दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्षों पुराने श्मशान घाट पर रेत माफिया अवैध उत्खनन कर रहे थे, जिसके चलते यह संवेदनशील स्थिति निर्मित हुई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने जिले में चल रहे व्यापक अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

 ज्ञात हो कि धमतरी जिले के ग्राम खरेंगा रेत खदान से जब  रेत निकाली जा रही थीं तभी मिट्टी और रेत में दबा मानव कंकाल बाहर निकल आया। जिसे देख मजदूरों और वाहन चालकों में अफरा-तफरी मच गई, देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुँच गए। ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थान से कंकाल मिला है वह गांव का पुराना पारंपरिक श्मशान घाट है, जहाँ वर्षों तक शव दफनाए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यहाँ भारी मशीनों से उत्खनन किया जा रहा है।

लोगों ने आरोप लगाया कि रात-दिन पोकलेन मशीनों से गहरी खुदाई होती रही और खनिज विभाग ने या तो अनदेखी की या फिर मिलीभगत से आँखें मूंद लीं। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि इससे पहले भी नदी किनारे खुदाई के दौरान मानव अवशेष मिले थे, लेकिन तब भी किसी स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। मामला उजागर होने के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने कहा कि धमतरी जिला इस वक्त पूरी तरह से रेत माफियाओं के चंगुल में है, और प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि इस अवैध कारोबार को सत्ता और अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।

रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अब हमारी आस्था और श्मशान घाटों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। ग्राम खरेंगा में महानदी किनारे स्थित पारंपरिक श्मशान घाट को खोदकर अवैध रेत निकाली गई, जिससे 10 से अधिक नरकंकाल और अस्थियां बाहर बिखर गईं। यह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मृतकों का घोर अनादर है। आगे कहा की नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर महानदी के तटीय क्षेत्रों में रात-दिन भारी-भरकम चैन माउंटेन से अवैध खुदाई की जा रही है। इससे प्राकृतिक जलस्रोत नष्ट हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। जिले के विभिन्न अंचलों में रेत के बड़े-बड़े अवैध डंप और भंडारण बनाए गए हैं।  खनिज विभाग और राजस्व अमला सिर्फ छोटे ट्रैक्टरों पर दिखावे की कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रहा है, जबकि मुख्य रेत माफिया और बड़े सिंडिकेट बेखौफ घूम रहे हैं। जब स्थानीय ग्रामीण या पंचायत प्रतिनिधि इस अवैध उत्खनन का विरोध करते हैं, तो रेत माफियाओं के गुर्गे उन्हें जान से मारने और झूठे केस में फंसाने की खुलेआम धमकी देते हैं। प्रशासन ग्रामीणों को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम रहा है। श्रीमती चंद्राकर नें आगे कहा की प्रदेश के मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस का खोखला दावा करते हैं. सुशासन का झूठा त्यौहार मना रहे हैं।  खरेंगा में हुए इस महापाप के लिए जिम्मेदार  अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई  और चल रहे अवैध खदान, रेत भंडारणों को तत्काल बंद करने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।


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