धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरूद, 28 मई। पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में हस्तक्षेप एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कुरुद ब्लॉक सरपंच संघ ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि पंचायतों को केवल कागजी अधिकार देकर वास्तविक निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
जनपद पंचायत के सभा कक्ष में हुई बैठक में कुरुद ब्लॉक के 76 सरपंचों ने भाग लिया, जिनमें से अधिकांश सत्ता पक्ष से जुड़े हुए है। बैठक में ग्राम पंचायतों की लगातार हो रही उपेक्षा, विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब, राशन कार्ड, पेंशन एवं जॉब कार्ड जैसे महत्वपूर्ण कार्य पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी के बिना सीधे विभागीय स्तर पर किए जाने, मनरेगा कार्यों का मूल्यांकन एवं भुगतान प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दे को लेकर सारे सरपंच एक शुर में सरकार और प्रशासन को घेरने लगे।
सरपंच संघ अध्यक्ष हरिशंकर साहू ने बताया कि काफी भागदौड़ करने के बाद 15वें वित्त का पैसा मिला, जबकि केन्द्र सरकार ने बहुत पहले ही इसे जारी कर दिया था। अब तक हमें 16 वें वित्त का पैसा मिल जाना था, लेकिन राज्य ने केंद्र को पहले का ही हिसाब नहीं दिया है। बैठक में कुछ सरपंचों ने आरोप लगाया गया कि पंचायतों से जुड़े निर्माण कार्य, मनरेगा कार्यों का मूल्यांकन एवं भुगतान प्रक्रिया अत्यंत धीमी गति से चल रही है, जिससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।
श्रमिकों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। वहीं राशन कार्ड, पेंशन एवं जॉब कार्ड जैसे महत्वपूर्ण कार्य पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी के बिना सीधे विभागीय स्तर पर किए जा रहे हैं, जो पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है। जिला सरपंच संघ धमतरी अध्यक्ष टिकेश साहू, पूर्णिमा साहू, जयमित्र साहू, पन्ना चंद्राकर, चेतन देवांगन, योगेश साहू, देशांत सिन्हा, पूरण धृतलहरे, पुष्पलता साहू, देवीचरण चंद्राकर, ज्योति मांडवी आदि सरपंचों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंचायतों को केवल कागजी अधिकार देकर वास्तविक निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
बैठक में इस बात के लिए भी नाराजगी जताई गई कि पंचायत कार्यकाल के 16 माह बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा सरपंचों की कोई औपचारिक बैठक नहीं की गई। लगातार सचिवों के माध्यम से निर्देश थोपे जा रहे हैं और निर्वाचित प्रतिनिधियों को केवल हस्ताक्षर तक सीमित किया जा रहा है। संघ का कहना है कि बड़े नेता अपने भाषणों में गांव को देश की आत्मा और भविष्य बताते नहीं थकते, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। जब गांव समृद्ध नहीं होंगे तो विकसित भारत और विजन 2047 का सपना कैसे पूरा होगा ?
सरपंच संघ ने जिला प्रशासन को 15 दिवस का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं किया गया तो पंचायत स्वायत्तता और अधिकारों की रक्षा हेतु चरणबद्ध बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


