धमतरी

बच्चों को सही दिशा और अवसर देना ही समाज का सबसे बड़ा दायित्व है...
26-May-2026 3:51 PM
बच्चों को सही दिशा और अवसर देना ही समाज का सबसे बड़ा दायित्व है...

 कातलबोड़ के शैक्षिक व करियर मार्गदर्शन शिविर में बोले कलेक्टर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 26 मई। बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ा निवेश है, बच्चों को सही दिशा और अवसर देना ही समाज का सबसे बड़ा दायित्व है। उक्त बातें धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने ग्राम कातलबोड़ में आयोजित नि:शुल्क शैक्षिक एवं करियर मार्गदर्शन शिविर के समापन समारोह में कही उन्होंने इस पहल को ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने वाला प्रेरक सामाजिक अभियान बताया।

कुरुद ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कातलबोड़ में पिछले चार सालों से साहू समाज बांनगर परिक्षेत्र द्वारा कर्मचारी प्रकोष्ठ के निर्देशन में नि:शुल्क शैक्षिक एवं करियर मार्गदर्शन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर  शिक्षा, संस्कार, करियर जागरूकता और सामाजिक चेतना को एक साथ जोड़ते हुए गांवों में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखने में सहायक भूमिका अदा की है।

यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा मार्गदर्शन, कक्षा 9वीं से 12वीं तक कठिन विषयों का अध्यापन, नैतिक शिक्षा, संगीत प्रशिक्षण और करियर काउंसलिंग जैसी गतिविधियां पूरी तरह नि:शुल्क संचालित की जा रही हैं। जिसमें वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और विशेषज्ञ बिना किसी मानदेय के बच्चों को समय देकर उनके भविष्य को संवारने में जुटे हैं।

सोमवार को समापन समारोह में शामिल हुए कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने पालकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखते हुए शिक्षा और संस्कार की ओर प्रेरित करें। उन्होंने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कक्षा आठवीं में लगाया गया इसी तरह का एक समर कैंप उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बना था। उन्होंने विद्यार्थियों को संघर्ष से सीखने, असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे मजबूत बनने और सफलता मिलने पर विनम्र बने रहने की सीख दी।

 कार्यक्रम की शुरुआत मैं हूं गुल्लक अभियान से हुई, जिसमें तुमनचंद एवं रंजीता साहू ने 300 बच्चों को गुल्लक और पेंटिंग किट वितरित की। गुल्लक पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपने सपनों और सामाजिक सरोकारों को रंगों में उकेरा। किसी चित्र में आईएएस बनने का सपना था, तो कहीं डॉक्टर, सैनिक, व्यवसायी और पर्यावरण रक्षक बनने की आकांक्षा दिखाई दी। जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और पक्षी बचाओ जैसे विषयों पर बच्चों की संवेदनशील सोच ने सभी को प्रभावित किया।

  कलेक्टर मिश्रा ने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए शीर्ष 10 प्रतिभागियों को मेडल और पुस्तकें प्रदान कर सम्मानित किया। पर्यावरण प्रेमी प्रमोद साहू ने बच्चों को सीड बॉल तैयार कर वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया, पक्षी प्रेमी मोहन साहू ने गौरैया संरक्षण हेतु नि:शुल्क घोंसलों का वितरण किया। योग, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए प्रशिक्षकों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। यह करियर शिविर आज इस बात का जीवंत उदाहरण बन चुका है कि यदि समाज, प्रशासन और शिक्षक मिलकर संकल्प लें, तो गांवों के बच्चे भी बड़े सपनों को साकार करने की क्षमता रखते हैं। यह पहल न केवल शिक्षा का प्रकाश फैला रही है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में आत्मविश्वास, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य की नई कहानी भी लिख रही है। इस मौके पर एसडीएम नभसिंह कोसले एवं आयोजन से जुड़े लोग उपस्थित थे।

 


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