धमतरी

जिस राह से बापू गुजरे उसे नैरो से ब्राडगेज में बदलने लगे 105 साल
19-Feb-2026 3:25 PM
जिस राह से बापू गुजरे उसे नैरो से ब्राडगेज में बदलने लगे 105 साल

सीआरएस मिश्रा ने की जांच, कुरुद से अभनपुर के बीच ट्रायल रन, 22 किमी 18 मिनट में तय किया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 19 फरवरी। एक सदी पहले जिन पटरियों से होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कंडेल नहर सत्याग्रह का नेतृत्व करने भाप इंजन ट्रेन से धमतरी पहुंचे थे, उसी रास्ते पर अब विद्युत शक्ति से ब्राडगेज ट्रेन रायपुर से अभनपुर, कुरुद होते हुए धमतरी पहुंचेगी। 18 फरवरी की शाम 4 बजकर 22 मिनट पर लोको पायलट ने हार्न बजाते हुए ट्रेन को आगे बढ़ाया। कुरूद-अभनपुर के बीच नई लाइन पर 22 किलोमीटर की दूरी ट्रायल रन में महज 18 मिनट में तय कर ली गई। नई रेल लाइन पर इलेक्ट्रिकल इंजन दौड़ते देखने पटरी के किनारे ग्रामीणों की खासी भीड़ उमड़ी थी।

गौरतलब है कि 10 सितंबर 1900 में रायपुर से कुरूद तक नैरो गेज रेल मार्ग शुरू की गई, एक सप्ताह में इसे धमतरी तक बढ़ाया गया। 1 दिसंबर 1926 को वन विभाग द्वारा कुरूद स्टेशन से सिहावा होकर 96 किमी लंबे ट्राम-वे का निर्माण कराया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1941 में इस ट्राम-वे को बंद कर इसकी पटरियां युद्ध प्रयोजनों के लिए निकाली गई।1987 में रायपुर-धमतरी नैरो गेज रेल मार्ग पर स्टीम इंजन की जगह डीजल इंजन से परिचालन शुरू किया गया। जिसे 2017 में बंद किया गया, अब 2026 में अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज रेल मार्ग विद्युतीकरण के साथ दोबारा शुरू किया जा रहा है।

बुधवार को कुरुद स्टेशन से 10 बोगियों वाली ट्रेन चली जिसमें कोलकाता से आए दक्षिण-पूर्व सर्कल कमिश्नर ऑफ सेफ्टी ब्रजेश मिश्रा, डीआरएम दयानंद, अपर महाप्रबंधक विजय साह, डीएसओ सुरेश चंद्र, डीईएन सीओ उत्कर्ष पांडे, डीईई  डीआरडी पारीक मिश्रा, डीओएम मनीष अग्रवाल, डीईई आरएस विवेक पटेल, डेन पी मोहम्मद, डीएसटीई आकाश कुमार, एडीईएन ट्रैक बीके चौधरी, एओएम राजेश साह सहित रेलवे के अन्य अधिकारी सवार थे। स्टेशन से आगे बढ़ते ही लोको पायलट ने गति बढ़ाई, कुछ सेकंड में ट्रेन की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई।

कुरूद और अभनपुर के बीच 22 किलोमीटर की दूरी ट्रायल रन के दौरान महज 18 मिनट में तय किया गया। ट्रेन शाम 4.22 बजे कुरूद से निकालकर सिर्री और चटौद पार करते हुए अभनपुर स्टेशन शाम 4.40 बजे पहुंची। नई रेल लाइन पर इलेक्ट्रिकल इंजन दौड़ते देखने पटरी के किनारे ग्रामीणों की भीड़ थी। यहाँ पर यह बताना लाजमी होगा कि 21 दिसंबर 1920 में रायपुर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कंडेल नहर सत्याग्रह का नेतृत्व करने भाप इंजन ट्रेन से धमतरी पहुंचे थे। उस समय धमतरी-रायपुर का रेल किराया डेढ़ से 2 रूपए था।

 द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1944 में धमतरी से कोंडागांव तक नेरोगेज रेल का विस्तार हुआ, लेकिन कुछ वर्ष बाद इसे बंद कर दिया गया था। लेकिन धमतरी से रायपुर तक नैरोगेज की ट्रेन चलती रही, जिसे ब्राडगेज में बदलने की मांग उठती रही। 1995-96 से धमतरी बड़ी रेल लाइन की मांग ने जोर पकड़ा, भूमिपूजन और सर्वे के नाम पर नेतागिरी भी खूब हुई, कई बार रेलवे अधिकारियों ने इसका निरीक्षण किया। तब कहीं जाकर 2011-12 में बड़ी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी और 543.93 करोड़ रूपए का बजट मिला। 2019 में भूमिपूजन के साथ केन्द्री रायपुर से धमतरी के बीच कुल 10 स्टेशन जिसमें अभनपुर, कुरुद, धमतरी के स्टेशन बड़े बनाने का काम शुरू हुआ।

 बताया गया कि रायपुर से धमतरी तक ट्रैक की कुल लंबाई 67.20 किमी है, इसमें नियमित रेल परिचालन से 25 लाख आबादी को लाभ मिलेगा। रायपुर मंडल रेल प्रबंधक दयानन्द ने बताया की सुरक्षा प्राधिकरण से हरी झंडी मिलते ही मार्च के अंत या 15 अप्रैल तक कुरूद-अभनपुर-रायपुर ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी।


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