धमतरी

कोया पूनेम गोंडी गाथा में गोंडवाना संस्कृति और समानता का संदेश
09-Feb-2026 7:20 PM
कोया पूनेम गोंडी गाथा में गोंडवाना संस्कृति और समानता का संदेश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरूद, 9 फरवरी। कोया पूनेम गोंडी गाथा के तीसरे दिन प्रवचन में प्रवाचक तिरू शंकर शाह इरपाची ने गोंडी संस्कृति, प्रकृति-पूजन और सामाजिक समानता की परंपरा को प्रभावशाली ढंग से बताया। इसके पूर्व नगर में भव्य शोभायात्रा यात्रा निकाली गई, जिसमें विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर आदिवासी समाज को बधाई दी।

खेल मेला मैदान में 6 से 11 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन के प्रथम दिन आदिवासी संस्कृति एवं परम्परानुसार शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें विधायक अजय चन्द्राकर अपने सहयोगी नेताओं के साथ शामिल हुए।

प्रवचन के तीसरे दिन तिरू शंकर शाह इरपाची ने गोंडवाना संस्कृति, गोटूल शब्द से आगे चलकर गुरुकुल की अवधारणा विकसित होने एवं अलाम और कलाम की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि गौतम बुद्ध के गुरु गोंडी धर्म से जुड़े थे और इसी से आगे चलकर बौद्ध धर्म का निर्माण हुआ। बौद्ध धर्म की तरह ही गोंडी धर्म में भी छुआछूत और भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। गोंडी दर्शन प्रकृति को सर्वोपरि मानता है, और प्रकृति कभी भेदभाव नहीं करती। तालाब में स्नान करने पर तालाब किसी से ऊँच-नीच नहीं पूछता—जो भेद करता है, वह ईश्वर या देवता नहीं हो सकता।

 प्रवचन में यह भी बताया गया कि गोंडी समाज में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। इसी समानता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रयतार जंगो दाई ने महिलाओं के अधिकारों के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए। उनके प्रयासों से आश्रमों की स्थापना हुई और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कार्य हुए। आज उसी का परिणाम है कि महिलाएं और पुरुष कंधे से कंधा मिलाकर सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य सभी क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर, सुरेंद्र ध्रुव, युआर ध्रुव, पुरुषोत्तम पड़ोटी, संतराम मरकाम, माखन ध्रुव, शैल्या नेताम, बसंत ध्रुव, दुर्गा, रोहित, नीलकंठ ध्रुव, कृष्ण ठाकुर, तुलसी ठाकुर, संतोष सोरी, शशिप्रभा, मदनलाल मरकाम,  फलेद्र ध्रुव सहित समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


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