दन्तेवाड़ा

आधा दर्जन गांवों में 3 दिनों तक हैंडपंप संधारण
02-May-2026 10:27 PM
आधा दर्जन गांवों में 3 दिनों तक हैंडपंप संधारण

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दंतेवाड़ा, 2 मई। दंतेवाड़ा में प्रचंड गर्मी का कहर जारी है। ऐसी प्रतिकूल दशाओं में जल अमृत का पर्याय बन जाता है। जिला दंतेवाड़ा का अंतिम छोर, सुकमा सीमा के निकट स्थित ग्राम पंचायत जंगमपाल, लंबे समय से जल संकट से जूझ रहा था। गर्मी बढऩे के साथ समस्या और गंभीर हो गई। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का दल तत्काल जंगमपाल के सुदूर गांवों के लिए रवाना हुई।

दुर्गम क्षेत्रों में इच्छा शक्ति से सफलता

विकासखंड कटेकल्याण के दुर्गम वनांचल क्षेत्र में बसे इन ग्रामों में उपकरणों  के साथ पहुंचना मुश्किल कार्य था। टीम ने लगातार तीन दिन और दो रातें गांवों में रहकर पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाने का कार्य किया। इस दौरान उन्हें घर-परिवार से दूर रहकर जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करना पड़ा, लेकिन उनका उद्देश्य स्पष्ट था, हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना।

इस अभियान के दौरान टीम का नेतृत्व लीड टेक्नीशियन उमा शंकर नेताम द्वारा किया गया। टीम ने जंगमपाल सहित आसपास के लगभग पाँच से छह गांवों जंगमपाल, प्रतापगिरी, छोटेलखापाल, छोटेतोंगपाल जैसे अंदरूनी ग्रामों का भ्रमण किया। जहां सामान से भरे पिकअप को नदी पार किया गया। कभी - कभी सामान कंधों पर रखकर पगडंडियों पर चलकर जाना पड़ा। प्रत्येक गांव में खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत की गई, आवश्यक तकनीकी सुधार किए गए, जल स्रोतों की सफाई की गई तथा जल स्रोतों का क्लोरीनेशन कर जल गुणवत्ता सुनिश्चित की गई।

इस अथक मेहनत से हैंडपंपों का पुनर्संचालन हुआ और ग्रामीणों को पुन: स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने लगा। विभाग की इस त्वरित और प्रभावी पहल से न केवल पेयजल व्यवस्था बहाल हुई, बल्कि ग्रामीणों में शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास भी और मजबूत हुआ।

जंगमपाल और आसपास के सुदूर गांवों में बहाल हुई यह पेयजल व्यवस्था  मानवीय संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण हैहै। इस संधारण टीम में टेक्नीशियन उमा शंकर नेताम, हेल्पर, राजेश नाग, राजू ठाकुर, गोविंद ठाकुर, विजेंद्र कश्यप, गौतम ठाकुर, अनिल ठाकुर और वीरेंद्र सेठिया शामिल थे।


अन्य पोस्ट