दन्तेवाड़ा

50 गांवों को किया राजस्व विवादमुक्त
29-Jun-2023 5:04 PM
 50 गांवों को किया राजस्व विवादमुक्त

दंतेवाड़ा, 29 जून। राजस्व संबंधित प्रकरण शहरी एवं ग्रामीण नागरिकों से सीधे सरोकार रखने वाले मुद्दो में शामिल है ये ऐसे मामले होते है जिनसे आए दिन हर किसी का साबका पड़ता रहता है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र दोनों इससे अछूते नहीं है चाहे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, त्रुटि सुधार, आय, जाति प्रमाण पत्र हो इसकी फेहरिस्त लंबी है। इस पर दूरस्थ ग्रामों के निवासरत ग्रामीणों के लिए राजस्व संबंधी मामले वास्तव में किसी सिरदर्दी से कम नहीं है, जिसमें कार्यालयों का चक्कर काटने के सिवा कोई चारा नहीं रहता ऐसी स्थिति में राजस्व अमले की त्वरित कार्यवाही, प्रभावी निराकरण सहित समाधान कारक फैसले ही ग्रामीणों को राहत दे सकते है,  इसके लिए प्रभावशाली मॉनिटरिंग, आवेदकों के मामले की तत्काल सुनवाई सहित उन्हें अन्य जानकारी उपलब्ध कराना एक गुरूत्तर दायित्व है और इस दायित्व का तत्परता से निर्वहन कर राजस्व विभाग राजस्व विवादमुक्त ग्राम के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अग्रसर हैं।

क्या है विवादमुक्त ग्राम

ऐसे राजस्व ग्राम जिनमें राजस्व संबंधी सभी प्रकार के विवादों का त्वरित निराकरण कर विवादमुक्त किया जाता है ऐसे ग्राम राजस्व विवादमुक्त ग्राम कहलाते है। इसके लिए राजस्व अमले द्वारा लगातार बी-1 का वाचन कर, राजस्व संबंधी आवेदनों को लेकर तत्काल निराकरण किया जाता है। इसके तहत नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, त्रुटिसुधार, द्वितीय किसान किताब, आय जाति, निवास प्रमाण पत्र प्रदाय करने जैसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं के निपटारे में तेजी लाई जाती है और आवेदनों का निराकरण विधिवत जांच करके तत्काल हितग्राहियों को उपलब्ध कराया जाता है।

ज्ञात हो कि जिले में कुल 235 ग्राम है जिसमें 2022-23 में कुल 50 ग्रामों को राजस्व विवादमुक्त ग्राम बनाया गया है तथा 2024 तक अन्य 85 ग्रामों को राजस्व विवादमुक्त ग्राम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

वर्तमान में जिले के अंतर्गत राजस्व विवादमुक्त ग्रामों में नामांतरण के 304 प्रकरण, बंटवारा के 36, सीमांकन के 32, त्रुटिसुधार के 28, किसान किताब के 79, जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र के क्रमश: 325, 352 एवं 213 सहित कुल 1 हजार 369 प्रकरणों का निराकरण किया गया है।

गौरतलब है कि कलेक्टर के विशेष निर्देश पर जिले में राजस्व विभाग से संबंधित निदान शिविर का आयोजन किया जाता रहा है और स्वयं कलेक्टर ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए उनसे भूमि संबंधित प्रकरणों के निराकरण की वस्तुस्थिति से अवगत होते है। बहरहाल एक लोक कल्याणकारी शासन प्रशासन की अवधारणा का मुख्य आधार उसका जनोन्मुखी एवं संवेदनशील होना है।


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