‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,24 मार्च। सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर के गंगापुर क्षेत्र में जिला प्रशासन ने मंगलवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि पर बने 37 अवैध मकानों को ध्वस्त कर दिया। सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में पुलिस बल की मौजूदगी रही। विरोध के दौरान कुछ लोगों ने जेसीबी पर पथराव भी किया, हालांकि स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया।
प्रशासन के अनुसार, उक्त भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण कर लोग निवास कर रहे थे। आरोप है कि जमीन माफियाओं ने राजनीतिक संरक्षण में इस सरकारी जमीन को 50 से 60 हजार रुपये प्रति डिसमिल की दर से बेच दिया था, जिसके बाद लोगों ने लाखों रुपये खर्च कर मकान बना लिए।
बताया गया कि यह भूमि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को आवंटित है, लेकिन अतिक्रमण के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा था। प्रशासन ने करीब एक वर्ष पूर्व ही कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे, लेकिन पालन नहीं होने पर यह कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान लोगों ने अपने घरों से सामान बाहर निकाला, जिसके बाद बुलडोजर से निर्माण हटाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान में लगभग 5 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। वहीं, दो मकानों को न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के कारण नहीं हटाया गया।
मौके पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) फागेश सिन्हा, तहसीलदार उमेश बाज, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल सहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
इधर, शहर के मठपारा, चाउरपारा और ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्रों में भी शासकीय जमीन की अवैध बिक्री और निर्माण के मामले सामने आ रहे हैं। इन पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मठपारा में फिर बढ़ा अवैध निर्माण का दायरा
मठपारा क्षेत्र से सटे शासकीय भूमि पर एक बार फिर अवैध निर्माण और मकानों की खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बिना वैध दस्तावेजों के मकानों की बिक्री की जा रही है। पूर्व में कार्रवाई के बावजूद निगरानी में ढील के चलते फिर से बड़े पैमाने पर निर्माण हो गया है।
सूचना मिलते ही महापौर मंजूषा भगत और सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी ने नगर निगम के उडऩदस्ता दल को जांच के लिए भेजा है। जनप्रतिनिधियों ने मामले में सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में अवैध कब्जों और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।