सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 4 मई। जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, सरगुजा में सामने आए बहुचर्चित करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने मामले से संबंधित दस्तावेज और जांच रिपोर्ट रायपुर मंगाई है, जिसे स्थानीय स्तर से भेज दिया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ईडी इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी पड़ताल करेगी।
जानकारी के मुताबिक, करीब एक वर्ष पहले बैंक की शंकरगढ़ और कुसमी शाखाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी एवं कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में लगभग 28 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया था। इसके बाद शाखा प्रबंधक सहित 12 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की अनुशंसा की गई थी, जिसके बाद राज्य शासन ने ईडी को जांच के लिए अधिकृत किया। सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीकांत चंद्राकर ने बताया कि एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए गए हैं और आगे भी पूरा सहयोग किया जाएगा।
जांच में यह सामने आया है कि वर्ष 2012 से 2024 के बीच फर्जी खातों के माध्यम से बड़े पैमाने पर राशि का हेरफेर किया गया। मुख्य आरोपी तत्कालीन शाखा प्रबंधक द्वारा कथित तौर पर फर्जी खातों का नेटवर्क तैयार कर अवैध निकासी और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए रकम का गबन किया गया।
आदिम जाति सहकारी समिति जमड़ी के नाम पर बिना वैध दस्तावेज खाता खोलकर उसमें 19 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कर निकाली गई। इसके अलावा कुसमी शाखा में मनरेगा और जनपद पंचायत के नाम पर भी फर्जी खाते खोलकर करोड़ों का लेन-देन किया गया। प्राथमिक जांच में कुछ राशि आरोपियों के निजी खातों और अन्य संस्थाओं में स्थानांतरित होने के प्रमाण भी मिले हैं। मामले में चार अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि अन्य के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
ईडी की जांच शुरू होने के बाद इस घोटाले के और बड़े नेटवर्क के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। एजेंसी अब बैंक के अन्य लेन-देन की भी गहन जांच करेगी।


