‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 3 जुलाई। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में सोमवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि कई बार जो काम गुरु की उपस्थिति नहीं करा पाती है, वह काम गुरु के आशीर्वाद से ही हो जाता है। हर बार गुरु प्रत्यक्ष हो यह जरूरी नहीं है। गुरु पर आपकी आस्था होनी चाहिए।
गुरु के प्रति आस्था, श्रद्धा और समर्पण नहीं हो, तो आपको आशीर्वाद भी नहीं मिल सकता है। आशीर्वाद के बिना जीवन में गुर का होना या नहीं होना एक बराबर है। गुरु का केवल ज्ञानवान होना आवश्यक नहीं है, गुरु के प्रति हमारे दिल में श्रद्धा का होना, आस्था का होना, समर्पण का होना आवश्यक है।
गुरु पूर्णिमा एक आध्यात्मिक पर्व है इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। गुरु पूजा का अर्थ है गुरु की आज्ञा का पालन करना एवं गुरु के उपदेशों का जीवन में आचरण करना।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमने ये जानना है कि गुरु कौन होते हैं, क्या करते हैं, गुरु क्यों बनाए जाते हैं, गुरु किसे कहते हैं। गु का अर्थ है अंधकार और रू का अर्थ है रोकने वाला। जो अज्ञान रूपी अंधकार को रोकते हैं वे गुरु कहलाते हैं, और जो महाव्रत धारी, धैर्यवान, संयम में स्थिर रहने वाले, धर्म का उपदेश देने वाले और जो खुद भी संसार सागर से पार हैं और शरण में आए हुए लोगों को भी संसार सागर से पार लगाने की समर्था रखते हैं वो होते हैं गुरु।
साध्वीश्री ने फरमाया कि चातुर्मासिक पर्व एक आत्मा के कलिमल को धोने का पर्व है। जिस प्रकार वर्षा होने से गली, मोहल्ले की सफाई होती है ठीक उसी प्रकार वर्षा वास से मानव मन की सफाई हो जाती है। उसी प्रकार धर्म आराधना करने से मानव मन की सफाई विषय विकारों की गंदगी सत्संग रूपी वर्षा से धूल जाती है। मोर जब गाता है, नाचता है तो सब को प्रिय लगता है इसी प्रकार एक आत्मार्थी को सत्संग रूपी गंगा में डुबकी लगाना प्रिय लगता है।
संगीतमय भजनों के साथ हुई गुरुवंदना
मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष सुशील कोचर और महासचिव नवीन भंसाली ने बताया कि गुरुपूर्णिमा के अवसर पर आज परम पूज्य हरीभद्रसुरी द्वारा रचित ललित विस्त्रा ग्रंथ की विधि विधान से पूजा की गई।
इस अवसर पर महिलाओं ने अपने अपने ग्रुप का प्रतिनिधित्व करते हुए संगीतमय भजनों की प्रस्तुति देते हुए गुरूवंदना की। महिलाओं ने गुरूवर्या हमको दीजिए जनम जनम का साथ, सारे तीर्थ आपके चरणों में हे गुरूवर्या प्रणाम आपके चरणों में, मेरे गुरूवर्या जैसे कोई नहीं, गुरूवर्या हमारे प्राणों से प्यारे हम सब के जीवन को आप ही संवारे, गुरु तेरे चरणों के धूल जैसे भजनों से समां बांध दिया।
मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित होगा। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को पूरे 5 माह वर्षावास मे जिनवाणी श्रवण का लाभ मनोहरमय चातुर्मास दादाबाड़ी में मिलेगा। आज गुरुपूजन का लाभ श्रीमती चुकी बाई चंदनमल जी सुराणा परिवार पुत्र प्रकाशचंद, मानकचंद, अशोकचंद, राजेंद्र कुमार, प्रपोत्र धीरज, वीरेंद्र, विक्रम सुराणा परिवार को प्राप्त हुआ है।