बिलासपुर
उम्र साबित न होने और पीड़िता के लव-रिलेशन स्वीकारने पर निर्णय
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 7 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डबल बेंच ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में दोषमुक्त किए गए युवक के खिलाफ शासन की अपील खारिज कर दी। अदालत ने पाया कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम होना साबित नहीं हुआ और उसने स्वयं आरोपी के साथ लव रिलेशनशिप की बात स्वीकार की।
रायगढ़ निवासी पीड़िता ने फरवरी 2016 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें शादी का वादा कर बार-बार संबंध बनाने का आरोप लगाया गया था। लेकिन मेडिकल जांच में किसी प्रकार की जबरदस्ती या चोट का प्रमाण नहीं मिला। जन्मतिथि संबंधी दस्तावेज भी भरोसेमंद नहीं पाए गए, क्योंकि प्रस्तुत जन्म प्रमाणपत्र एफआईआर के चार महीने बाद जारी हुआ।
कोर्ट ने कहा कि न तो कोटवारी रजिस्टर, न स्कूल एडमिशन रिकॉर्ड और न ही विश्वसनीय जन्म प्रमाण प्रस्तुत किया गया। मेडिकल परीक्षण में पाए गए 28 दांत भी उम्र 18 वर्ष से अधिक होने का संकेत देते हैं।
इन परिस्थितियों में स्पेशल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त करने के फैसले को उचित मानते हुए हाईकोर्ट ने शासन की अपील खारिज कर दी।


