बिलासपुर
सिम्स बिलासपुर में प्रथम वर्ष एमबीबीएस विद्यार्थियों ने किया भावनात्मक संकल्प समारोह
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 18 अक्टूबर। सिम्स (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में शुक्रवार को प्रथम वर्ष एमबीबीएस छात्रों ने कैडावेरिक ओथ लेकर चिकित्सा शिक्षा के अपने पहले नैतिक संस्कार की शुरुआत की। यह विशेष समारोह एनाटॉमी विभाग में आयोजित हुआ, जहां छात्रों ने मानव शरीर को अपना पहला शिक्षक मानते हुए उसे सम्मान और श्रद्धा देने की शपथ ली।
कार्यक्रम में सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति एनाटॉमी विभाग की प्रमुख डॉ. शिक्षा जांगड़े, और नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा फैकल्टी सदस्य डॉ. अमित कुमार, डॉ. प्रीमलता येडे, डॉ. वीना मोटवानी और डॉ. कमलजीत बसन भी मौजूद रहीं।
छात्रों ने शपथ के दौरान यह संकल्प लिया कि वे शव (कैडावर) को अपने पहले शिक्षक के रूप में आदर देंगे, उसकी गोपनीयता और गरिमा का सम्मान करेंगे तथा इस अध्ययन से प्राप्त ज्ञान का उपयोग मानव सेवा और समाज कल्याण के लिए करेंगे।
डीन डॉ. मूर्ति ने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा शिक्षा का पहला गुरु कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि मानव शरीर होता है। ऐसे शरीरों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान रखना हर चिकित्सक का पहला कर्तव्य है। विभागाध्यक्ष डॉ. शिक्षा जांगड़े ने कहा कि यह शपथ केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन अदृश्य योगदानकर्ताओं के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपनी देह दान कर विद्यार्थियों को चिकित्सक बनने की दिशा दिखाई है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर था जब उन्होंने महसूस किया कि डॉक्टर बनना केवल विज्ञान सीखना नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को समझना भी है। सभी छात्रों ने देह दान दाताओं और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की और मौन श्रद्धांजलि दी।
एनाटॉमी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देहदान प्रक्रिया, शरीर संरक्षण, मेडिकल एथिक्स और गोपनीयता पर भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम का समापन दीप प्रज्वलन, पुष्प अर्पण और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


