बिलासपुर
दोनों परिवारों के बीच रंजिश थी, बयान में मिले कई विरोधाभासी तथ्य
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 14 सितंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महासमुंद जिले के एक युवक को 2005 में दर्ज दुष्कर्म और धमकी के मामले में दोषमुक्त कर दिया। न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है।
अदालत ने पाया कि पीड़िता की गवाही में कई असंगतियां थीं। एफआईआर में बार-बार दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था, लेकिन कोर्ट में केवल एक घटना का जिक्र किया गया। मेडिकल जांच में न तो गर्भपात के कोई सबूत मिले और न ही यह पुष्टि हुई कि गर्भधारण का कारण कथित घटना थी। शिकायत सात महीने की देरी से दर्ज की गई, जिसका कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। इसके अलावा, आरोपी और पीड़िता के पिता के बीच पुरानी रंजिश भी उजागर हुई। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त करने का फैसला किया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बसना थाना क्षेत्र की 18 वर्षीय युवती, जो बचपन से दोनों पैरों से पोलियो से ग्रस्त थी, अपने घर पर अकेली थी। करीब छह महीने पहले, जनवरी 2005 में, करिया उर्फ मालसिंह बिंझवार ने कथित तौर पर उसके घर में घुसकर दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने दावा किया कि इसके बाद भी आरोपी कई बार जबरन यौन शोषण करता रहा, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। सात महीने बाद, 10 जनवरी 2005 को पीड़िता ने अपने पिता को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद बसना पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई।
हाईकोर्ट ने आरोपी करिया उर्फ मालसिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और 506-बी (आपराधिक धमकी) के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही, ट्रायल कोर्ट के 9 सितंबर 2005 के दोषसिद्धि आदेश को रद्द करते हुए, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 481 के तहत जमानत की शर्तों को छह महीने तक लागू रखने का आदेश दिया।


