बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 11 मई। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। बेमेतरा ब्लॉक के कई गांवों में योजना के तहत टंकियां और पाइपलाइन तो बनाई गई हैं, लेकिन कई स्थानों पर नियमित जलापूर्ति नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों ने पेयजल संकट और अधूरी व्यवस्थाओं को लेकर नाराजग़ी जताई है।
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता द्वारा झिरिया, बिटकुली, मुलमुला, बिरनपुर सहित कुछ गांवों का दौरा करने पर ग्रामीणों ने अलग-अलग समस्याएं बताईं। कई स्थानों पर लोगों ने पानी की आपूर्ति बाधित होने, पाइपलाइन लीकेज और तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की।
झिरिया: 2 हजार की आबादी, आधे को पानी
जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर ग्राम झिरिया में पानी टंकी का निर्माण किया गया है, लेकिन इसका लाभ गांव की 2000 की आबादी को नहीं मिल रहा। ग्रामीणों के अनुसार गांव में 325 नल कनेक्शन दिए गए हैं, जिनमें से आधे से अधिक सूखे पड़े हंै।
ग्रामीण रामावतार ने बताया कि लोगों को पानी के लिए दूसरे गांवों तक जाना पड़ रहा है। सुबह होते ही पूरा गांव पानी के लिए युद्ध स्तर पर जुड़ जाता है। लोग अपनी साइकिल पर गुंडी और डिब्बे बांधकर दो से चार किलोमीटर दूर बिटकुली गांव जाने को मजबूर हंै। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
युवाओं का कहना है कि पंचायत हर साल लाखों रुपए पानी के नाम पर खर्च करती है, लेकिन आज भी आधी बस्ती प्यासी है।
बिटकुली: एक पुराने आरओ प्लांट के सहारे 5 गांव
यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से खारे पानी से प्रभावित है। जिसके कारण लोग घरेलू नल के पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं कर सकते। यहां साल भर पहले एक नया आरओ प्लांट लगाया गया था, जो अब आसपास के पांच गांव बिरनपुर, आंदू , भंनसुली और चंदनू की जीवन रेखा बन गया है।
ग्रामीणों के अनुसार यहां लगा आरओ प्लांट आसपास के गांवों के लोग भी उपयोग कर रहे हैं। ग्रामीण अशोक कुमार ने बताया कि पड़ोसी गांवों से भी लोग यहां पानी लेने आते हैं, जिससे लोगों को इंतजार करना पड़ता है।
मुलमुला: टंकी बनी, जलापूर्ति शुरू नहीं
ग्राम मुलमुला में अगस्त 2022 में 1.39 करोड़ की लागत से नल जल योजना की शुरुआत की गई थी। 1.20 लाख लीटर क्षमता की पानी टंकी बनकर तैयार है और गांव के पास घरों में नल कनेक्शन भी लगा दिए गए हैं। लेकिन 3 साल बीत जाने के बाद भी इस टंकी में पानी भरने के लिए पावर पंप ही नहीं लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि घरों तक कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन अब तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
ग्रामीण उत्तम साहू और रूपेण साहू ने आरोप लगाया कि पाइपलाइन बिछाने के बाद कई स्थानों पर मरम्मत संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव के लोग अब भी हैंडपंप पर निर्भर हैं।
बिरनपुर और अन्य गांवों में भी शिकायतें
ग्राम बिरनपुर और कुछ अन्य गांवों के ग्रामीणों ने भी जलापूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्याओं और अधूरे कार्यों की शिकायत की। ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर सडक़ खुदाई के बाद मरम्मत पूरी नहीं हुई है।
आंदोलन की चेतावनी
मुलमुला सहित कुछ गांवों के ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द जलापूर्ति शुरू कर पाइपलाइन की समस्याएं दूर की जाएं। ग्रामीणों ने कहा कि समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा।
व्यवस्था सुधारने ठेकेदार को निर्देश-ईई
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के कार्यपालन अभियंता जगदीश प्रसाद गोड़ ने कहा कि ग्राम मुलमुला की व्यवस्था सुधारने के लिए ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ग्राम झिरिया में कुछ लोग पाइपलाइन से टुल्लू पंप के जरिए पानी खींच लेते हैं, जिससे सप्लाई प्रभावित होती है। पंचायत को इस पर ध्यान देना चाहिए।


