बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 14 फरवरी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के आदेशानुसार एवं अध्यक्ष, प्रधान जिला न्यायाधीश सरोज नंद दास के मार्गदर्शन तथा अनिता कोशिमा रावटे, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में लाइवलीहुड कॉलेज चोरभ_ी में ‘‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’’ विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन एवं विद्यार्थियों को मध्यस्थता की प्रक्रिया, उसके लाभ तथा नि:शुल्क विधिक सहायता योजनाओं के संबंध में जानकारी प्रदान करना था।
मध्यस्थता की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी
शिविर में अधिकार मित्र पंकज घृतलहरे, धरमू बारले एवं तरूण आनंद द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को बताया गया कि मध्यस्थता न्यायालयीन प्रक्रिया से भिन्न एक वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली है। इसमें एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर उन्हें आपसी सहमति से समाधान तक पहुँचने में सहयोग करता है।
उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया लचीली, सरल एवं कानूनी जटिलताओं से मुक्त होती है, जिससे आपसी मतभेद कम होते हैं और सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाधान संभव होता है। अधिकार मित्रों ने बताया कि मध्यस्थता से बहोत से लाभ प्राप्त होते हैं जैसे रिश्तों में आई दरार को सुधारने और संबंधों को पुन: स्थापित करने का अवसर मिलता है। पक्ष स्वयं अपने निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। हिंसा, घृणा एवं तनाव से दूर रहकर सभ्य एवं संवादात्मक समाधान संभव होता है।
यह प्रक्रिया मुकदमे का विचारण नहीं करती और न ही गुण-दोष पर निर्णय देती है। न्यायिक प्रक्रिया की तुलना में यह कम खर्चीली है। सफलता की संभावना अधिक होती है तथा यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी सिद्ध होती है। पक्षों को एक-दूसरे की बात सुनने और भावनाओं को समझने का अवसर मिलता है। कुछ घंटों या दिनों में समाधान संभव है, जिससे समय की बचत होती है। समझौते से मानसिक शांति प्राप्त होती है। मध्यस्थता से निराकृत प्रकरणों में न्याय शुल्क की छूट भी प्रदान की जाती है।
शिविर में बताया गया कि मध्यस्थता के माध्यम से निम्नलिखित प्रकार के विवादों का समाधान संभव है। दुर्घटना दावा प्रकरण, घरेलू हिंसा के मामले, चेक बाउंस प्रकरण, वाणिज्यिक विवाद, सर्विस मैटर, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली प्रकरण, विभाजन एवं बेदखली संबंधी मामले, भूमि अधिग्रहण प्रकरण
नालसा योजनाओं एवं विधिक सहायता की जानकारी
कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई। नालसा टोल फ्री नंबर 15100 एवं सालसा मोबाइल नंबर 9340062331 के माध्यम से नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की जानकारी साझा की गई। साथ ही पॉक्सो अधिनियम 2012, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध नि:शुल्क कानूनी सहायता, आशा अभियान 2025 के अंतर्गत बाल विवाह को अपराध के रूप में रोकथाम, तथा साइबर अपराध में डिजिटल अरेस्ट एवं मनी म्यूल्स से संबंधित सावधानियों के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों एवं उपस्थित नागरिकों में विधिक जागरूकता बढ़ाने तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया गया।


