बस्तर

ओंकारेश्वर मंदिर का पांच दिनी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू
02-Feb-2026 11:21 PM
ओंकारेश्वर मंदिर का पांच दिनी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 2 फरवरी। शहर के मैत्री संघ मार्ग स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पांच दिवसीय भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव मंगलवार से प्रारंभ हो रहा है। महोत्सव से पूर्व सोमवार को विधिवत वनयाग वन यज्ञ संपन्न कराया गया। इस दौरान ग्राम करकापाल स्थित माता शीतला मंदिर के पास से दुर्लभ सहाड़ा वृक्ष की लकड़ी का पूजन-हवन कर संग्रह किया गया।

मंदिर समिति के अनुसार सहाड़ा वृक्ष की लकड़ी से विश्वकर्मा द्वारा इंद्र और शची की प्रतिमा तैयार की गई है, जिसे रत्नों सहित मंदिर के गुंबद में प्राण-प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या पर स्थापित किया गया। मान्यता है कि इससे मंदिर पर भविष्य में वज्रपात का खतरा नहीं रहता।

समिति ने बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 3 से 7 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। महोत्सव की शुरुआत मंगलवार दोपहर 2 बजे महादेवघाट से भव्य कलश यात्रा के साथ होगी, जो नगर भ्रमण करते हुए मंदिर परिसर पहुंचेगी। इस यात्रा में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर शामिल होंगी।

कार्यक्रम के तहत 4 फरवरी को मंडप प्रवेश और मंडल देवता स्थापना, 5 फरवरी को देवता अधिवास, महा-स्नान, नगर परिक्रमा, रत्न गर्भ प्रतिष्ठा और शिखर कलश प्रतिष्ठा के अनुष्ठान होंगे। मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 6 फरवरी को अभिजित मुहूर्त में दोपहर 12.15 से 1.56 बजे के बीच संपन्न होगा। इसी दिन देवता गर्भ प्रवेश अनुष्ठान भी किया जाएगा।

मंदिर में ओंकारेश्वर महादेव, भगवान गणेश, मां दुर्गा, राम दरबार, भगवान हनुमान और माता संतोषी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। महोत्सव का समापन 7 फरवरी को दोपहर 1 बजे महाप्रसाद भंडारे के साथ होगा।

मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं महापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि यह महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूत करेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की। आयोजन के दौरान स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई है।

महोत्सव की तैयारियों और पूजा-अर्चना में संजय पाण्डेय, आचार्य रामराज त्रिपाठी, पंडित चंदन त्रिपाठी, रंगा आचार्य, सुकुमार धर, राजेश महावर, संध्या महावर, रेखा पाण्डेय, सुब्रा दास, किरण सोनी, रजनी पाठक और सुशीला देवी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।

वनयाग का महत्व

वनयाग एक प्राचीन वैदिक परंपरा है, जिसमें यज्ञ या देवकार्य के लिए वन से लकड़ी, शिला आदि का चयन किया जाता है। इसमें स्थल शुद्धि, गौरी-गणेश पूजन, कलश स्थापना, रुद्र और वनदुर्गा की आराधना के साथ हवन किया जाता है। वृक्ष छेदन से पहले क्षमा प्रार्थना और प्रायश्चित किया जाता है, जिससे धार्मिक कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सके।


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