बस्तर

कतरंगट्टा में हुई झूठी मुठभेड़ की भर्त्सना करें..., नक्सलियों ने प्रेसनोट में लगाए कई आरोप
21-May-2024 6:59 PM
कतरंगट्टा में हुई झूठी मुठभेड़ की भर्त्सना करें..., नक्सलियों ने प्रेसनोट में लगाए कई आरोप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 21 मई। गढ़चिरौली में हुए हाल में मुठभेड़ को नक्सलियों की पश्चिम सब जोनल ब्यूरो ने फर्जी मुठभेड़  बताया। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी, पश्चिम सब जोनल ब्यूरो प्रवक्ता श्रीनिवास ने जारी प्रेस नोट में कहा कि कतरंगट्टा में हुई झूठी मुठभेड़ की भर्त्सना करें। गढ़चिरोली के क्रांतिकारी आंदोलन में अपने प्राणों को न्योछावर किए युवा क्रांतिकारी कामरेड्स वासू, कमला, रेश्मा के बलिदानों को ऊंचा उठाईएं।

प्रेसनोट में आगे कहा, एक तरफ छत्तीसगढ़ और दूसरी तरफ महाराष्ट्र में पुलिस अपनी मनमानीढंग से जनता को बर्बरतापूर्वक हत्या कर रहा है। पिछले पांच दशकों से ज्यादा समय से इन क्षेत्रों में चल रही दण्डकारण्य क्रांतिकारी आंदोलन को जड़ से मिठाने की दुष्ट संकल्प के साथ पिछले पांच महीनों से ऑपरेशन कगार नाम से एक विशेष सैनिक अभियान चलाया जा रहा है। इस कैंपेन के तहत पुलिस छत्तीसगढ़ में कई नरसंहारों को अंजाम दे रहा है, महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में पुलिस ने क्रांतिकारियों को पकड़ कर झूठी मुठभेड़ों में भून डाल रहा है। इन तमाम प्रकारों के हत्याएं एवं मानव संहारों को भत्र्सना करते हुए उनके विरोध में आंदोलन खड़े करने के लिए हमारी पार्टी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) पश्चिम सब जोनल ब्यूरो जनता एवं जनवादी प्रेमियों से अनुरोध कर रही है।

गढ़चिरोली जिला भामरागढ़ तहसिल के कतरंगट्टा में स्थानीय दल कमांडर, डिवीजनल कमेटी मेंबर एवं डिवीजनल कमांडर इन चीफ कामरेड वासू (सतीश कोरचा) के साथ कामरेड्स कमला पुल्सूम, रेश्मा मडक़ामी को जिंदा

पकड़ कर पुलिस ने भून डाले। पुलिस ने बाद में यह घोषणा किया है कि पेरमिली दल का सफाया किया गया है। इस झूठी मुठभेड़ को हमारी पार्टी तीव्र रूप से भत्र्सना करते हुए इसके विरोध में मई 30 को जनता आवाज उठाने के लिए आह्वान कर रही है। काकूर-टेकामेट्टा जंगल में हुई पुलिस की मुठभेड़ में अपनी जान गवांए हमारी पार्टी के वरिष्ठतम नेतागण एवं कार्यकर्ताओं सहित ग्रामीणों के स्मृति दिवस उसी दिन मनाते हुए कतरंगट्टा में हुई हत्याओं का भी निंदा करें।

कॉमरेड वासू (मधू, समर) पूर्व बस्तर डिवीजन बोधघाट एरिया के छोटी गोडिया गांव से 2008 में पीएलजीए में भर्ती हुआ। जब वे साथी 16 साल उम्र का नवजवान थे। वे पार्टी से चलाये जा रहे प्राथमिक साम्यवादी प्रशिक्षण पाठ्यशाला में 6 माह के प्रशिक्षण कोर्स पूरी किये पहली ब्याच से निकला हुआ साथी था। बाद में उन्होंने 2009 अक्टोबर में नेतृत्वकारी कामरेड के सुरक्षा टीम में शामिल होकर 2021 बीच तक याणि लगभग 12 साल काम किए। 2021 बीच से लेकर 2024 मई 13 को आखरी सांस छोडऩे तक वे साथी गढ़चिरोली डिवीजन के पेरमिली दल का प्रभारी (डीवीसीएम) का जिम्मेदारियां निभाते हुए विगत 4 महिनों से कामरेड वासू डिवीजनल कमांडर इन-चीफ का जिम्मेदारी भी लिये थे।

क्रांतिकारी आंदोलन में लगभग पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा समय से अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी जवानी उम्र में दुश्मन से किए गए झूठी मुठभेड़ में शहीद हुए। उनके क्रांतिकारी योगदान सदा याद रहेगी। उनमें पहलकदमी, दृढ़संकल्प, सांगठनिक अनुशासन, सैनिक क्षेत्र में रूचि, नया विषय को सीखने के लिए जज्बा एवं सैद्धांतिक और राजनीतिक अध्ययन पर विशेश ध्यान देना उन से नये पीढी सीखने की आदर्शमय लक्षण है। उनके शहादत से गढ़चिरोली आंदोलन एक बेहतरीन भविष्य वाले साथी को खोने की बावजूद उन से बताए गये राजनीति से प्रशिक्षित आज के पीढ़ी के नवजवान आगे बढक़र उनके अपूर्णीय क्षति को पूरा करने की दृढ़ विश्वास के साथ हमे आगे बढ़ेंगे।

कामरेड कमला एवं रेश्मा भी अपनी जवानी उम्र में ही पीएलजीए में भर्ती हुए थे। कामरेड कमला 2018 में पश्चिम बस्तर डिवीजन के अवकेम से और कामरेड रेश्मा 2018 में दक्षिण बस्तर डिवीजन के बुडगिन गांव से भर्ती हुई थी। वे अपने लिए अनजान एरिया होने के बावजूद, जनता से गहरा रिश्ता न रहने पर भी और भौगोलिक स्थिति के बारे में समझदारी नही रहने की बावजूद बिना हिचकिचाहट वे गढ़चिरोली पहुंच कर पार्टी से दिए गए जिम्मेदारियों को स्वीकार किया। इन दो साथी संपूर्ण विश्वारा एवं संकल्प के साथ जनता के बीच में गए और काम करने के समय पर कतरंगट्टा में हुई झूठी मुठभेड में प्राणों को बलिदान किए।

गढ़चिरोली जिला के पुलिस मई 13 को कतरंगट्ट में 3 साथियों को झूठी मुठभेड़ में मारा। मार्च 19 को अहेरी तहसिल के लिंगनपल्ली में विश्वासघात के साथ हुई धोखा से चार साथियों को जिंदा पकड़ कर पुलिस उन्हें झूठी मुठभेड़ में मारे हैं। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ बॉर्डर के नारायणपुर जिला काकूर टेकामेट्टा जंगल में अपनी पारंपरिक पूजा-पाठ करने के लिए पहुंचे गांव के महिला एवं पुरूषों में से 4 आदिवासी युवाओं को उन जनता के सामने ही गोली मार कर बून डाला। इसी दिन इस एरिया में हमारी पार्टी एवं पीएलजीए के 6 साथियों को पुलिस ने मारे हैं। मई 10 को बीजापुर जिला पिडिय़ा के जंगल में तेन्दूपत्ता तोडने वाले 12 जन गांव वालों को पुलिस के कमांडो बल ने हजारों की तादाद में घेर कर गोलियों से बून डाले। जंगलों में रहने वाले आदिवासी जनता को निर्ममता से हत्या कर उनके मृत शरीर के बगल में भरगार-बंदूक, विस्फोटक पद्धार्थ एवं क्रांतिकारी साहित्य रखकर तमाम हत्याओं को वैदता पाने के लिए उन लोगों को इनामी माओवादी के रूप में मनगढंत कहानियों से भरा बयान पुलिस जारी कर रहे हैं।

विशाल वन क्षेत्र में सदियों से क्रूर जानवरों के बीच में अपनी आत्मरक्षा के लिए थीर-धनुष एवं भरमार के साथ आदिवासी लोग जीना एक आम बात है। उस प्रकार के आदिवासियों को हथियारबंद माओवादी कहते हुए क्रूर जानवरों से ज्यादा आतंकीत कर मनमानी से उनका हत्या किया जा रहा है। जनता में एक दहशत महौल को पैदाकर जनता से क्रांतिकारियों को अलगकर और बड़े पैमाने पर क्रांतिकारियों का हत्या करने के लिए पुलिस ने अपनी मनमानी से न कानून, न संविधान का परवा करते हुए जनसंहारों को अंजाम दे रहे है। हर नरसंहार के बाद देश के गृहमंत्री अमितशाह मोदी का रागालाप करते हुए पुलिस से मारे गए माओवादियों का आंकड़ें जारी कर सरकारी की तरफ से अनुमोदन दे रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री एवं मुर्दों के गिनती के लिए थड़पने वाले पुलिरा के वरिष्ठतम अधिकारीगण उन तमाग हत्यारों का रारहना कर रहे हैं। इनके साथ जुड़े हुए कुछ मीडिया कर्माचारी यह कहते हुए पुलिस से किए जा रहे निर्मम हत्याओं का समर्थन कर रह है की एक हड़बड़ परिस्थिति में बिचारे पुलिस मजबूरी में गांव वालों को मार रहे हैं। यह कहते हुए वीडियो स्टोरी बनाकर अधिकारियों का वहवाही लूट रहा है।

अफस्पा (सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून) लागू हो रहे पूर्वोत्तर प्रांत में भारतसेना के जवानों से किए जा रहे नरसंहारों के तर्ज पर ही यहां पर मानवसंहार को अंजाम दिया जा रहा है। कश्मीर की तर्ज पर मध्य भारत के जंगलों में खासकर बस्तर में नये-नये पुलिस कैम्प खोलकर खाकी वनों में तब्दिल किया जा रहा है। इस गैर कानूनी एवं गैर संविधानिक कार्रवाईयों का खंडन करते हुए मानव संहारों को रोखने के लिए आंदोलन करने के लिए जनता एवं जनवादी प्रेमी, मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील, लेखक, कलाकार, छात्र, कर्माचारी, बुद्धिजीवी मुख्य रूप से आदिवासी जन संगठन एवं आदिवासी हितैषियों से हमारी पार्टी अनुरोध कर रही है।

गढ़चिरौली में हुए हाल में मुठभेड़ को नक्सलियों की पश्चिम सब ज़ोनल ब्यूरो ने बताया फ़र्ज़ी मुठभेड़ मारे गए तीनों को बताया अपना साथी पकड़ कर मारने का लगाया आरोप।


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