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नक्सलियों ने 14 को ब्राम्हणवाद व पूंजीवाद विरोध दिन के रूप में मनाने की अपील
11-Apr-2023 9:12 PM
नक्सलियों ने 14 को ब्राम्हणवाद व पूंजीवाद विरोध दिन के रूप  में मनाने की अपील

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 11 अप्रैल।
सीपीआई (माओवादी) के केन्द्रीय कमेटी सारे जन संगठनों वर्ग संगठनों, मजदूर, किसान अम्बेडकर वादी दलित, ओबीसी आदिवासी युवा बुद्धिजीवी, साहित्यकर लेखक छात्र-छात्राए को 14 अप्रैल को ब्राम्हणवाद विरोध और पूंजीवाद विरोधी दिन के रूप में पालन करने का और पूरे देश भर में मिलिटेंट जाति के खिलाफ और ब्राम्हणीय हिन्दूत्व फासीवाद के खिलाफ आंदोलन को खड़ा करने की अपील की है। 

उन्होंने जारी पर्चे में कहा कि अम्बेडकर की भगवाकरण के खिलाफ विरोध करे। फासीवादी विरोधी और उग्र जातिवाद विरोधी संघर्षों को खड़ा करे ! 14 अप्रैल को ब्राम्हणवाद विरोध और पूंजीवाद विरोध दिन के रूप में मनाए!

समाज हर मनुष्य को याद नहीं रखता परंतु वह उन मनुष्य को जरूर याद रखता है जो अपने जीवन को समाज सुधार के लिए प्रतिबद करते है। ऐसे ही एक मनुष्य भारत के धरती पे 14 अप्रैल 1891 को जन्म लिया इसका नाम है डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) अम्बेडकर को क्रातिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करती है। अम्बेडकर अन्याय के खिलाफ संघर्षो का प्रतिक है। वह हमें सीखाते है कि मनुष्य की आपदा समाजिक कारणों से उत्पन्न होता है, और मनुष्य अपनी पीड़ा को आंदोलन, शिक्षा और संगठित होकर मीटा सकता है एक लोकतंत्रिक और मानव समाज के निर्माण के लिए अम्बेडकर अपने विचार और समाजिक अभियास में विशाल है।

ऐसे समय पर अम्बेडकर जयंती को मनाया जा रहा है जब पूरे देश में हिन्दूत्वा फासीवाद दमन चल रहा है। अम्बेडकर वह है प्रकास जिसे हिन्दूत्व गभराता है। आरएसएस और भाजपा की हुकुमत अम्बेडकर की विचारों के विपरित है। आरएसएस- भाजपा ने अम्बेडकर के सिद्धांत जैसे, समनता, धर्म निरपेक्सता, भाई चारा और लोकतंत्रा को कचरे के डब्बे में पेक दिया है। आज आरएसएस-भाजपा भारत के लिए बीमारी बन चुके है। यह बीमारी दूसरे भारतीयों के स्वस्थ और कुशी के लिए संकट का कारण बन रहा है। 

अम्बेडकर की भगवाकरण की परियोजना आरएसएस की हिन्दू राष्ट्रीय का एजेण्डा का अटूट अंक है। इस परियोजना का एक मात्र मकसद दलितो को आरएसएस की तरफ अकार्षित और दलितो को क्रांतिकारी राजनीतिक से दूर रखना है बीजेपी 6 अप्रैल से 14 अप्रैल तक अपने स्थापना दिवस के नाम पर अम्बेडकर जयंती को मनाने के लिए बहुत सारे योजनाए लिए है, यह इसलिए क्योंकि वह दलितों को अन्य पीछड़ा जतियों के लोगों को अपने संगठन से जोडऩा चाहती है। आरएसएस बीजेपी भारतीय सविधान को हटाकर मनुसविरती को लाने का प्रत्यना कर रही है। बहुत सारे अफवाहें अम्बेडकर को लेके आरएसएस- बीजेपी ने फैलया है, खासकर अम्बेडकर की विचार मार्क्सवाद के उपर दक्षिणपंथी ताकतों ने अम्बेडकर की भगवाकरण की माध्यम से मार्क्सवाद के उपर और क्रांतिकारी दलित राजनीति के ऊपर खुला युद्ध छोड़ दिया है। यह इतिहासिक सत्य है कि अदि कोई विचार अम्बेडकर की नजदिक रहा है तो वह माक्र्सवाद है पर आरएसएस-भाजपा सचाई को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है। उनके लिए सचाई कडवा है, क्योंकि हो सचाई से डरते है।

सीपीआई (माओवादी) बाकी सारे व्यक्ति के जैसे बहुत ग्रव मेहसुश करती है जब वह अम्बेडकर की विशाल स्मारक को (125 फीट का) तेलंगाना में देखती है, पर जब दलित की पीढ़ा और उनके अमानवीय परिस्थिति को तेलंगाना में और भारत के अन्य राज्यों में देखती है तो अम्बेडकर की विचार उसके विशाल प्रतिमा के सामाने कापी छोटा पर चुका हैं। शासक वर्ग अपने फायदों के लिए अम्बेडकर को याद करते है। केसीआर और बीआरएस दलित समुदाय के वोट के लिए तुष्टीकरण की राजनीतिक कर रही है। जब से भारत में आरएसएस मोदी सत्ता में आये है तब से दलितों और बाकी उत्पीडित जातियों पर अत्यचार बढ़ चुका है फासीवादी गाँव रक्षाक के नाम पर दलित और मुशलमान समुदाय लोगों को मारना, और डराना कॉपी तेजी से चल रहा है। 

शिक्षा के क्षेत्र में दलितों से बेदभाव की नीति कॉपी तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसके कारण उत्पीडि़त जातियों ज्ञान की गरिबी के शिकार ही नहीं बल्कि ज्ञान से वंचित भी रखा जा रहा है। जब भारत में दलाल पुँजीवाद ने नया उदाहरवाद नीतियों को लागू किया गया उसे सबसे प्रभावित अधिक उत्पीडित जाति के लोगों हुवें हैं भूमिहिन दलित किसान की संख्या पिछले 2 दशक में कॉपी विरद्धि हुई है। दलितों के उपर आज भी ग्रमिणक्षेत्रों में गैर अर्थिक शोषण की प्रक्रिया चल रही है। यह दर्शाता है कि आज भी भारत देश में अर्धसामंती परिस्थितियों का प्रभुत्व है। अम्बेडकर जातिवाद के खत्मे के लिए संघर्ष करे थे और जातिवाद तभी खत्म हो सकता है जब भारत देश में अर्धसामंती - अर्धउपनिवेश परिस्थितियों को जड़ से हटाया जाए।

अम्बेडकर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि, दलितों के दो प्रधान दुश्मन है एक ब्राम्हणवाद दूसरा पूंजीवाद सीपीआई (माओवादी) के केन्द्रीय कमेटी सारे जन संगठनों वर्ग संगठनों, मजदूर, किसान अम्बेडकर वादी दलित, ओबीसी आदिवासी युवा बुद्धिजीवी, साहित्यकर लेखक छात्र-छात्राए को 14 अप्रैल को ब्राम्हणवाद विरोध और पूंजीवाद विरोधी दिन के रूप में पालन करने का और पूरे देश भर में मिलिटेंट जाति के खिलाफ और ब्राम्हणीय हिन्दूत्व फासीवाद के खिलाफ आंदोलन को खड़ा करने की अपील की है। 


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