बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 18 दिसंबर। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह मेडिकल स्टोर्स बिना फार्मासिस्ट के ही संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी है, बावजूद इसके भी किसी प्रकार की कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है । नगर सहित ग्रामीण इलाके में दर्जन भर से अधिक मेडिकल स्टोर्स हैं।
कहने को तो मेडिकल स्टोर्स के संचालन के लिए डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट के आधार पर लाइसेंस जारी किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे परे है। नगर व ग्रामीण क्षेत्र के कुछ मेडिकल व्यवसायी नियमों को ताक में रखते हुए मेडिकल का संचालन कर रहे हैं। बिना फार्मासिस्ट व जरूरी दस्तावेज के मेडिकल दुकान का व्यवसाय किया जा रहा है।
कई मेडिकलों में अपात्र व्यक्तियों को जिम्मेदारी दे दी गई है, जिनको दवाइयों की जानकारी तक नहीं है। इन मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ न तो ड्रग इंस्पेक्टर कोई कार्रवाई करते हैं और ना ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। ऐसा ही एक मामला लोहडीगुड़ा ब्लॉक के बढ़ाजी में साहू मेडिकल स्टोर में देखने को मिला जहां पर बिना फरमासिस्ट के ही मेडिकल का संचालन किया जा रहा है साथ ही मेडिकल के आड़ में अवैध क्लिनिक का संचालन कर लोगों का इलाज किया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि पूर्व में अवैध क्लिनिक चलाते हुए श्री साहू पर मेडिकल टीम ने शील बंद कार्रवाई भी की थी बावजूद इसके भी संचालक तमाम नियमों को मुँह चिढ़ाते नजर आ रहे है। मेडिकल स्टोर में किराना दुकान की तरह ही घर का कोई भी सदस्य बैठ जाता है। कभी श्री साहू की पत्नी तो कभी उनके बच्चे और जिस फरमासिस्ट की डिग्री मेडीकल दुकान में लगाई गई है वह कभी मेडीकल में दिखाई ही नहीं देते।
जब इस पूरे मामले को लेकर मौके पर ‘छत्तीसगढ़’ की टीम पहुंची , और वहां इलाज करवाने आये सीरिसगुड़ा के एक व्यक्ति से बात की तो उनका कहना है कि वह श्री साहू के पास हाथ पैर दर्द बुखार की शिकायत लेकर इलाज करवाने आए हैं, और उनको एक बॉटल ग्लूकोस चढ़ाया गया साथ ही उनको एक इंजेक्शन व कुछ दवाई दिया गया है जिसकी कीमत उनको 450 रुपये बताया गया है।
मेडिकल व क्लिनिक संचालन के विषय पर श्री साहू से ‘छत्तीसगढ़’ ने जानकारी ली तो उनका कहना है हमारे यहाँ फरमासिस्ट बस्तर के प्रेम शंकर शुक्ला है, वह कभी कभी आते है और शाम के समय बैठते है मैंने लाइसेंस लीज में लिया है, जिसका मैं एक साल में 30 हजार फरमासिस्ट को देता हूं।
सोचने वाली बात है कि गैर डिप्लोमा, डिग्रीधारी द्वारा मेडिकल का संचालन करने से मरीजों की जान को खतरा बना हुआ है। अचंभित करने वालीं बात तो तब होती है जब पता चलता है कि चिकित्सा विभाग को इसकी पूरी जानकारी है बावजूद इसके भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस पूरे मामले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर श्री नाग को‘छत्तीसगढ़’ ने जानकारी के लिए फोन किया तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।
इस पूरे मामले में सहायक औषधि नियंत्रक हेमंत श्रीवास्तव खाद्य एवं औषधि प्रशासन बस्तर का कहना है कि क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन सीएमएचओ साहब के अंडर में आता है हमारे अंडर में नहीं आता। मेडिकल संचालन के लिए औषधि एवं सामग्री नियमावली के अंतर्गत अनुज्ञप्ति दी जाती है, जिसमें नियम और शर्तें होती है। उन शर्तों के आधार पर की मेडिकल संचालन करने का आदेश दिया जाता है, फार्मासिस्ट को मेडिकल पर बैठना चाहिए बिना फार्मासिस्ट के मेडिकल संचालन नहीं किया जा सकता है, आप के माध्यम से जानकारी आई है जिस पर तत्काल निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।


